इसके अलावा, मौजूदा सुरक्षा खतरों को देखते हुए, राज्य पुलिस बलों के जवान और गाड़ियां भी काफिले के हिस्से के तौर पर तैनात की जाती हैं। नतीजतन, प्रधानमंत्री के साथ चलने वाली गाड़ियों की कुल संख्या कभी-कभी बढ़कर 30 से 40 के बीच हो सकती है। प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के ज़्यादा इस्तेमाल की भी वकालत की है। सूत्रों ने बताया कि PM मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस बदलाव के दौरान कोई नई गाड़ी नहीं खरीदी जानी चाहिए। पीएम मोदी के अलावा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, जिन्हें Z+ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है और जो आम तौर पर 11 गाड़ियों के काफिले के साथ चलते हैं। अब सिर्फ़ चार गाड़ियों का काफिला इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इसी तरह, गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी अपने सरकारी काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाकर सिर्फ़ चार कर दी है। रक्षा मंत्री की तरह, इन दोनों मंत्रियों को भी Z+ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है।
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BJP-शासित राज्यों द्वारा उठाए गए कदम
यह सिर्फ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट ही नहीं है, जिन्होंने खर्च में कटौती की मुहिम के तहत कदम उठाए हैं। BJP-शासित कई राज्यों ने भी सरकारी खर्च में कटौती करने और मंत्रियों व अधिकारियों के बीच संयम को बढ़ावा देने के मकसद से निर्देश जारी किए हैं। महाराष्ट्र में सरकार ने मंत्रियों के अपनी मर्ज़ी से सरकारी विमानों का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है; अब सिर्फ़ बहुत ज़रूरी सरकारी काम के लिए ही विमान का इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिसके लिए मुख्यमंत्री से पहले मंज़ूरी लेनी होगी। कुछ मंत्रियों के विदेश दौरे भी रद्द कर दिए गए हैं।
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दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर घोषणा की कि मंत्री और सरकारी अधिकारी “कम से कम वाहनों” का इस्तेमाल करेंगे और कारपूलिंग तथा सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चलने वाले काफिलों के आकार में 50 प्रतिशत की कटौती का आदेश दिया है। उनकी अपील के बाद, कई विधायकों ने भी अपने एस्कॉर्ट वाहन छोड़ना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सिर्फ तीन वाहनों के काफिले के साथ यात्रा करना शुरू कर दिया है, जबकि राज्य के स्वास्थ्य और श्रम मंत्रियों ने एस्कॉर्ट वाहनों का पूरी तरह से त्याग करने का फैसला किया है।
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