फ्रांस में स्टूडेंट्स का प्रोटेस्ट आज (शुक्रवार को) हिंसक हो गया। आज स्कूलों के लाखों स्टूडेंट सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट करने सड़कों पर उतरे। कई जगहों पर आगजनी की। स्कूल के गेटों पर ताला लगा दिया। जगह-जगह तोड़फोड़ की। सरकार के खिलाफ नारे लगाए। फ्रांस की पुलिस से कई जगहों पर इनकी झड़प हुई। पुलिस को टियर गैस छोड़नी पड़ी, लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान 2000 से ज्यादा स्टूडेंट्स को अरेस्ट किया गया है। सैकड़ों छात्र, स्कूल टीचर घायल हैं। 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
फ्रांस के स्कूल में एजुकेशन का लेवल ठीक करने की डिमांड
सिचुएशन इतनी बिगड़ गई कि आज फ्रांस के प्राइम मिनिस्टर को क्राइसिस मीटिंग बुलानी पड़ी। सारे मंत्रियों के दौरे रद्द कर दिए गए। 550 से ज्यादा हाई स्कूल अगले आदेश तक बंद करने पड़े। दरअसल ये स्टूडेंट्स स्कूलों में सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। एजुकेशन का लेवल ठीक करने की डिमांड कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूल में पढ़ाई के घंटे बहुत ज्यादा हैं। क्लासरूम में एसी नहीं है, गर्मी बहुत ज्यादा लगती है। स्कूल टीचर उन्हें ठीक से नहीं पढ़ाते हैं।
पूरे फ्रांस में फैला पेरिस से शुरू हुआ प्रदर्शन
गौरतलब है कि इन प्रोटेस्ट की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस से हुई थी, जो धीरे-धीरे पूरे फ्रांस में फैल गए। अब ज्यादातर स्कूलों के छात्र इन प्रोटेस्ट में शामिल हो चुके हैं। इस वक्त फ्रांस में भी नौजवान सड़कों पर हैं। स्कूलों में, यूनिवर्सिटीज में, इंस्टीट्यूट्स में आगजनी हो रही है। फ्रांस की सरकार परेशान है। असल में फ्रांस के स्टूडेंट्स पढ़ाई के बोझ से परेशान नहीं हैं। उनका कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई के घंटे ज्यादा हैं। इसे कम किया जाए। स्कूलों में AC नहीं है। सरकार क्लासरूम्स में AC लगाए।
छात्रों ने की नई बिल्डिंग्स की मांग
छात्रों का ये भी कहना है कि स्कूलों की बिल्डिंग्स पुरानी हो गई हैं, उन्हें नई बिल्डिंग चाहिए। जो टीचर्स जरूरत से ज्यादा सख्ती करते हैं वो टीचर उन्हें नहीं चाहिए। इन मांगों को लेकर फ्रांस के स्कूलों के लाखों स्टूडेंट्स सड़कों पर हैं। इससे पहले, इसी साल जनवरी में फ्रांस में सड़कों पर किसान भी उतर गए थे। उन्होंने ट्रैक्टर से संसद तक मार्च किया था।
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