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क्या आपने कभी सोचा है कि आप जो खाना खा रहे हैं, उसमें एंटीबायोटिक भी हो सकता है? सुनकर हैरानी हो सकती है, लेकिन ये सच है। मीट, दूध, अंडे और यहां तक कि फल–सब्जियों के जरिए भी एंटीबायोटिक हमारे शरीर तक पहुंच सकता है।
दरअसल, पशुपालन और फूड प्रोडक्शन के दौरान इस्तेमाल होने वाली दवाएं कई बार भोजन में अवशेष के रूप में रह जाती हैं। ये मात्रा भले ही बहुत कम हो, लेकिन लंबे समय तक इसे खाने से सेहत बिगड़ सकती है।
दुनिया भर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को लेकर जो चिंता जताई जा रही है, उसमें एक बड़ा कारण सीधे फूड के जरिए हमारी थाली तक पहुंच रहे एंटीबायोटिक्स भी हैं। पाचन और इम्यून सिस्टम कमजोर होने से लेकर गंभीर बीमारी तक, इसके कई खतरनाक नतीजे हो सकते हैं।
इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज फूड में शामिल एंटीबायोटिक की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- एंटीबायोटिक खाने में कैसे आते हैं?
- कौन से फूड आइटम्स ज्यादा रिस्की हैं?
- अपने लिए सुरक्षित भोजन कैसे चुनें?
एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर
सवाल- क्या सच में हमारे भोजन में एंटीबायोटिक मौजूद होते हैं?
जवाब- हां, ये सच है। ऐसा हमेशा 100 फीसदी मामलों में नहीं होता, लेकिन काफी बड़े पैमाने पर होता भी है। आमतौर पर एनिमल प्रोडक्ट्स जैसे मीट, अंडा और दूध के जरिए एंटीबायोटिक हमारी थाली तक पहुंचता है।
सवाल- एंटीबायोटिक खाने में आते कैसे हैं?
जवाब- इसे पॉइंटर्स में विस्तार से समझिए–
पशुओं को दवा देना
मुर्गी, गाय, भैंस, मछली आदि को इलाज के दौरान एंटीबायोटिक दिए जाते हैं। कभी-कभी प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए भी इनका उपयोग किया जाता है।
विथड्रॉल पीरियड फॉलो न करना
जानवरों को दवा देने के बाद कुछ समय तक उनके दूध या मांस का उपयोग करना मना होता है। अगर यह नियम फॉलो न किया जाए तो दवा के अवशेष भोजन में आ सकते हैं।
मछलियों को एंटीबायोटिक देना
तालाब या फार्म में मछलियों को बीमारियों से बचाने के लिए पानी में एंटीबायोटिक मिलाए जाते हैं, जो मछलियों के शरीर में जमा हो सकते हैं।
गलत डोज देना
अगर एंटीबायोटिक जरूरत से ज्यादा या डॉक्टर के कंसल्टेशन के बिना दी जाए तो उनके अवशेष रहने का रिस्क बढ़ जाता है।
खेती में कीटनाशकों का इस्तेमाल
फार्मिंग के दौरान अगर सही मात्रा से ज्यादा कीटनाशक यूज किए जाएं तो उनके अवशेष भी फल–सब्जियों में बचे रह जाते हैं।
सवाल- किन फूड आइटम्स में एंटीबायोटिक होने की संभावना ज्यादा होती है?
जवाब- जो फूड सीधे पशुपालन या एक्वाकल्चर (मछली और अन्य जलीय जीवों का पालन) से आते हैं, उनमें एंटीबायोटिक के अवशेष होने का रिस्क ज्यादा होता है। सभी फूड्स की लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या पौधों/सब्जियों में भी एंटीबायोटिक हो सकते हैं?
जवाब- हां, खेती में भी कीटनाशककों का इस्तेमाल होता है। मानक लिमिट से ज्यादा यूज करने पर इसके अंश हमारे भोजन तक पहुंच सकते हैं।
पौधों पर दवा का छिड़काव
फसलों को कीड़ों, फंगस आदि से बचाने के लिए कीटनाशकों का का इस्तेमाल किया जाता है।
एनवायर्नमेंटल पॉल्यूशन
इंडस्ट्रियल वेस्ट या दवाइयों के गलत तरीके से निस्तारण से भी मिट्टी और पानी प्रभावित हो सकते हैं।
जैविक खाद
अगर पशुओं को एंटीबायोटिक दिए गए हों तो उनके गोबर से बनी खाद में दवा के अंश हो सकते हैं। इससे एंटीबायोटिक पौधों तक जा सकता है।
दूषित पानी से सिंचाई
अगर सिंचाई में ऐसा पानी इस्तेमाल हो, जिसमें एंटीबायोटिक हों तो मिट्टी के जरिए पौधों तक पहुंच सकता है।
सवाल- भोजन के जरिए शरीर में जाने वाले ये एंटीबायोटिक कितने खतरनाक हैं?
जवाब- ये एंटीबायोटिक आमतौर पर बहुत कम मात्रा में होते हैं। इसलिए ये तुरंत कोई नुकसान नहीं करते। हालांकि, इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इससे लंबे समय में गंभीर नुकसान हो सकते हैं। सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- इससे कौन-सी हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं?
जवाब- भोजन के जरिए शरीर में जाने वाले एंटीबायोटिक अवशेष से कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या इसका सीधे साइड इफेक्ट होता है या लंबे समय में असर दिखता है?
जवाब- ये एंटीबायोटिक की मात्रा पर निर्भर करता है।
- अगर भोजन में एंटीबायोटिक की मात्रा ज्यादा है तो तुरंत साइड इफेक्ट दिख सकते हैं।
- अगर एंटीबायोटिक की मात्रा कम है तो लंबे समय में इसके नुकसान सामने आ सकते हैं।
सवाल- क्या इससे ‘एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस’ भी बढ़ सकता है?
जवाब- हां, इसका सबसे बड़ा रिस्क एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस ही है।
- अगर भोजन के जरिए बार-बार एंटीबायोटिक शरीर में जा रहे हैं तो शरीर में मौजूद बैक्टीरिया उन दवाओं के आदी हो जाते हैं।
- धीरे-धीरे ये बैक्टीरिया खुद को इस तरह बदल लेते हैं कि दवाएं उन पर असर करना बंद कर देती हैं।
सवाल- भारत में कौन-सी एजेंसियां फूड में एंटीबायोटिक कंट्रोल करती हैं?
जवाब- इसके लिए भारत में कई एजेंसियां मिलकर काम करती हैं-
1. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI)
यह भारत में फूड्स से जुड़े सभी मानक तय करती है।
2. स्टेट फूड सेफ्टी अथॉरिटीज
- दुकानों, डेयरी, मीट शॉप आदि की जांच करती हैं।
- सैंपल लेकर लैब में टेस्ट करती हैं।
3. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन
दवाओं की मंजूरी, क्लिनिकल ट्रायल्स और क्वालिटी तय करती हैं।
4. डिपार्टमेंट ऑफ एनिमल हसबेंडरी एंड डेयरिंग
- डेयरी, पोल्ट्री, एनिमल हेल्थ से जुड़े नियम बनाता है।
- पशुओं में दवाओं के सही उपयोग के दिशा-निर्देश देता है।
सवाल- FSSAI ने एंटीबायोटिक की क्या लिमिट तय की है?
जवाब- FSSAI के अनुसार, एंटीबायोटिक की सीमा दवा, फूड्स और उपयोग पर निर्भर करती है।
- सामान्य एंटीबायोटिक्स के लिए सीमा लगभग 0.01 mg/kg होती है।
- खतरनाक एंटीबायोटिक्स जैसे क्लोरोफेनिकोल के लिए यह बहुत कम (लगभग 0.0003 mg/kg) होती है।
- कुछ मामलों में 0.001 mg/kg या उससे कम लिमिट होती है।
सवाल- कैसे पता चलता है कि खाने में एंटीबायोटिक है?
जवाब- इसे देखकर, स्वाद या स्मेल से पता नहीं लगाया जा सकता है। इसके लिए लैब टेस्ट जरूरी है।
- ‘फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ के अनुसार ‘माइक्रोबियल इनहिबिशन टेस्ट, ELISA और LC-MS/MS’ जैसे टेस्ट से एंटीबायोटिक की मौजूदगी और मात्रा का पता चलता है।
- दूध के लिए कुछ रैपिड टेस्ट किट भी उपलब्ध हैं, लेकिन सबसे सटीक रिजल्ट लैब टेस्ट से ही मिलते हैं।
सवाल- क्या आम उपभोक्ता खुद इसे पहचान सकते हैं?
जवाब- नहीं, आम उपभोक्ता खुद से फूड्स में एंटीबायोटिक की मात्रा नहीं पता कर सकते, क्योंकि रंग, स्वाद और गंध से इसका पता नहीं चलता है।
उपभोक्ता केवल विश्वसनीय ब्रांड, FSSAI लाइसेंस वाले प्रोडक्ट खरीदकर इसके रिस्क को कम कर सकते हैं।
सवाल- हम एंटीबायोटिक्स से कैसे बच सकते हैं?
जवाब- इसके लिए इन 8 बातों का ध्यान रखें-
- ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ लाइसेंस वाले प्रोडक्ट ही खरीदें।
- दूध, मीट और अंडे भरोसेमंद ब्रांड से ही लें।
- बहुत सस्ते या संदिग्ध सोर्स से फूड्स न लें।
- भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाएं।
- कच्चे और पके भोजन को अलग रखें।
- रसोई और हाथों की साफ-सफाई बनाए रखें।
- ऑर्गेनिक या सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दें।
- स्थानीय विश्वसनीय दुकानदार या सप्लायर से ही खरीदारी करें।
सवाल- क्या ऑर्गेनिक फूड्स पूरी तरह सुरक्षित हैं?
जवाब- नहीं, इसे पूरी तरह सुरक्षित नहीं कहा जा सकता है, लेकिन ये कुछ हद तक बेहतर होते हैं।
क्यों पूरी तरह सुरक्षित नहीं?
- ऑर्गेनिक में भी कीटनाशक उपयोग होते हैं।
- मिट्टी, पानी या हैंडलिंग से बैक्टीरिया/संक्रमण आ सकता है।
- गलत स्टोरेज या गंदगी से रिस्क बढ़ सकता है।
फिर भी बेहतर क्यों माना जाता है?
- सिंथेटिक केमिकल और एंटीबायोटिक का उपयोग कम होता है।
- फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया जैसे नियमों के तहत सर्टिफाइड होता है।
सवाल- क्या खाने को पकाने से एंटीबायोटिक खत्म हो जाते हैं?
जवाब- नहीं, खाने को पकाने से एंटीबायोटिक पूरी तरह खत्म नहीं होते।
- कई एंटीबायोटिक हीट-स्टेबल होते हैं यानी गर्मी सहन कर लेते हैं।
- उबालने या पकाने से उनकी मात्रा थोड़ी कम हो सकती है, पर पूरी तरह नहीं खत्म होती है।
- इसलिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मानकों वाले फूड्स ही लें।
सवाल- डॉक्टर्स इस बारे में क्या कहते हैं?
जवाब- डॉ. रोहित शर्मा के मुताबिक, खाने में एंटीबायोटिक अवशेष एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकते हैं।

सवाल- न्यूट्रिशनिस्ट और फूड साइंटिस्ट इस बारे में क्या कहते हैं?
जवाब- खाने में एंटीबायोटिक अवशेष लॉन्ग टर्म में हेल्थ प्रॉब्लम्स बढ़ा सकते हैं।
- यह गट माइक्रोबायोम को प्रभावित कर सकते हैं।
- लगातार एक्सपोजर से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बढ़ सकता है।
- इम्यूनिटी और पाचन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
- बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा प्रभाव होता है।
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