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एक तरफ यह सब चल रहा है, रेलवे की तस्वीर बदल रहे है, प्रधानमंत्री मोदी फ्यूचर रेडी भारत की तस्वीर खीच रहे हैं और इधर भारत में फ्यूचर के लिए ऐसी तकनीक भी बन रही है कि दुनिया हैरान है। भारत में ऐसा चुम्बक बना है, जिससे चीन सबसे ज़्यादा हैरान परिशान है। यह चुम्बक देश के लिए पैसा खींच कर लाने वाला चुम्बक है। पैसा मतलब नोत नहीं। दरअसल बैंगलुरू की एक डीप टेक स्टार्टप है, इसने इलेक्टरिक व्हीकल्स के लिए खास तकनीक विकसित करने का दावा किया है, जिससे न सिर्फ भारत के लिए, बल्कि दुनिया भर के ईवी मार्केट के लिए, इसे गेम चेंजर माना जा रहा है। ईवी मोटर के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इस तकनीक को वर्चुअल मैग्नेट मोटर कहा जा रहा है, ये तकनीक इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्यूंकि ईवी मोटर बनाने के लिए, ये चीन से आने वाले रेयर अर्थ मिनिरल्स पर निर्भरता को कम कर सकती है। ई-वी की लागत को स्थिर रख सकती है, ईवी की लागत को स्थिर रख सकती है। आम तौर पर ईवी में परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर होता है। इसका इस्तमाल किया जाता है, जिससे गाड़ी चलती है, पीएमएस मोटर में नियोडिमियम, लोहा और बोरान के रेयर अर्थ मैग्नेट लगे होते है, इन रेयर अर्थ मैग्नेट की मदद से ही यह मोटर चलती है, जिससे गाड़ी चल पाती है, एक इलेक्ट्रिक व्हीकल में 1-3 किलो का रेयर रेयर अर्थ मैंगनेट लगता है।
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हालिया दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी दुनिया में कहां कहां से रेयर अर्थ मिनिरल्स मिल सकता है उसके लिए दौरा कर रहे हैं, जिससे चीन पर निर्भरता कम हो। अब बैंगलोर की कम्पनी वाइमाग इसके मुताबिक उनकी नई तकनीक बिना किसी रेयर अर्थ मैंगनेट के इस्तेमाल को किये मोटर चलाने की क्षमता रखती बल्कि इस कम्पनी ने वर्चुअल मैंग्नेट से चलने वाली मोटर बना दी है इस नई मोटर में कम्पनी ने फिजिकल मैंग्नेट की बजाए इलेक्ट्रॉनिकली जनरेटेड मैंग्नेट का इस्तेमाल किया है जिसकी वजह से इसे वर्चुअल मैंग्नेट कहा जा रहा है यानि इस मोटर में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल होगा जो मैंग्नेट के बगैर मैंग्नेट वाला काम कर रही है। कम्पनी के इंजिनियर्स ने इसे सॉफ्टवेयर कंट्रोल भी बना दिया यानि अपनी सुविधा के अनुसार इसके मैंग्नेटिक फिल्ड को कम और ज्यादा कर सकेंगे वो भी सिर्फ सॉफ्टवेयर से कंट्रोल होना बड़ी बात इसलिए है क्योंकि मोटर चलाना एक बात है लेकिन उसे कंट्रोल्ड तरीके से चलाना अलग बात है तो यानि यहां रेयर अर्थ पर निर्भरता भी कम होगी, सस्ते में काम होगा, बेहतर काम होगा, पैसा बचेगा।
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