यूरोपीय यूनियन (EU) भीषण गर्मी को आपदा मानते हुए इससे निपटने के लिए नया हीटवेव प्लान बनाएगा। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को कहा कि इस साल की गर्मी ने यूरोप को बड़ा सबक दिया है। उन्होंने बताया कि हीटवेव के दौरान यूरोप में 35 हजार से ज्यादा मौतें हुईं। तेज गर्मी से नदियों सूख गई और कई देशों में जंगलों में भयानक आग लगी। अब जंगलों की आग पर जल्दी काबू पाने के लिए EU आग बुझाने वाले विमानों का अपना बड़ा बेड़ा तैयार करेगा। गर्मी के कारण डेन्यूब, राइन जैसी नदियों का पानी सूखा भीषण गर्मी के कारण यूरोप की कई बड़ी नदियों में पानी कम हो गया। इनमें डेन्यूब, राइन और फ्रांस की गारोन नदी भी शामिल हैं। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि कई अस्पताल और बुजुर्गों के केयर होम इतनी ज्यादा गर्मी की चपेट में आ गए कि वहां रहना मुश्किल हो गया। उनके मुताबिक, गर्मी का असर शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा रहा। आग बुझाने वाले विमानों के बेड़े में अभी कम विमान हैं इस साल यूरोप के कई देशों में जंगलों में भयानक आग लगी। इससे करीब 6.60 लाख हेक्टेयर जमीन जल गई और करीब 1.2 करोड़ टन फसलें बर्बाद हो गईं। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि EU अब आग के सबसे ज्यादा खतरे वाले 100 इलाकों की पहचान करेगा। इन इलाकों में आग लगने के खतरे और उससे बचने की तैयारी की जांच की जाएगी। अभी EU के पास आग बुझाने वाले विमानों का छोटा बेड़ा है। आग लगने पर EU सदस्य देशों के बीच विमान, पानी के टैंकर और राहतकर्मी भेजने की व्यवस्था भी करता है। अब इस पूरी व्यवस्था को और बड़ा किया जाएगा। इस योजना को बेहतर बनाने के लिए अनुभवी फायरफाइटर्स और राहत टीमों से भी सुझाव लिए जा रहे हैं। जंगल की आग बुझाते समय जान गंवाने वाले पायलट को याद किया EU कमीशन की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन ने ग्रीस में आग बुझाते समय जान गंवाने वाले डेनमार्क के हेलिकॉप्टर पायलट रूने किंडल को भी याद किया। अगस्त में जंगल की आग बुझाने के दौरान उनकी मौत हो गई थी। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि रूने ने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान दे दी। उनके नाम का जिक्र होते ही यूरोपीय संसद में लोगों ने तालियां बजाईं। जलवायु परिवर्तन की वजह से यूरोप में गर्मी और बढ़ेगी वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन की एक स्टडी के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन की वजह से यूरोप में इस साल इतनी ज्यादा गर्मी देखने को मिली। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोप दुनिया के औसत तापमान के मुकाबले करीब दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है। उनके मुताबिक आने वाले सालों में यूरोप को तेज गर्मी और ज्यादा झेलनी पड़ सकती है। यूरोप दुनिया के औसत से दोगुनी तेजी से क्यों गर्म हो रहा है? आर्कटिक का असर यूरोप आर्कटिक के काफी करीब है। आर्कटिक दुनिया के बाकी हिस्सों के मुकाबले ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है। इसका असर यूरोप के मौसम और तापमान पर भी पड़ रहा है। जमीन समुद्र से जल्दी गर्म होती है जमीन समुद्र के मुकाबले जल्दी गर्म होती है। यूरोप का बड़ा हिस्सा जमीन पर है, इसलिए यहां तापमान तेजी से बढ़ रहा है। हवाओं का बदलता पैटर्न यूरोप में हवा और जेट स्ट्रीम के रास्ते में बदलाव भी गर्मी बढ़ा रहा है। कई बार गर्म हवा एक जगह लंबे समय तक फंस जाती है। इससे हीटवेव ज्यादा तेज और लंबे समय तक चलती है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… जंगली कुत्ते मादा की तलाश में 4000 km घूमे: 9 महीने तक जोड़ीदार तलाशते रहे जाम्बिया के काफ्यू नेशनल पार्क से निकले तीन अफ्रीकी जंगली कुत्तों ने साथी और नया इलाका तलाशने के लिए करीब 4,126 किमी का सफर तय किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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