पुराना PF नए अकाउंट में कैसे ट्रांसफर करें?
1- सबसे पहले EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने UAN और पासवर्ड से लॉगिन करें।
2- इसके बाद ऑनलाइन सर्विसेज सेक्शन में जाएं और वन मेंबर-वन EPF अकाउंट (Transfer Request)” विकल्प चुनें।
3- फिर Employee Centric Services के तहत “रिक्वेस्ट फॉर ट्रांसफर ऑफ अकाउंट” पर क्लिक करें।
4- यहां अपना UAN नंबर दर्ज करें और “Get Details” पर क्लिक करें।
5–अब उस पुराने PF अकाउंट का चयन करें, जिसका पैसा नए अकाउंट में ट्रांसफर करना है।
6- सभी जानकारी जांचने के बाद OTP के जरिए अनुरोध को सत्यापित करें और सबमिट कर दें।
7- आवेदन जमा होने के बाद आप “Track Claim Status” विकल्प में जाकर अपने ट्रांसफर की स्थिति भी देख सकते हैं।
अगर आपके पास दो UAN हैं तो क्या करें?
कई बार नौकरी बदलने के दौरान कर्मचारियों के दो अलग-अलग UAN बन जाते हैं। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। आप [uanepf@epfindia.gov.in](mailto:uanepf@epfindia.gov.in) पर दोनों UAN की जानकारी भेज सकते हैं। जांच के बाद EPFO पुराने UAN को निष्क्रिय (Deactivate) कर देगा और आपका पैसा सक्रिय UAN से जोड़ दिया जाएगा। दूसरा तरीका यह है कि आप अपने नए नियोक्ता (Employer) के माध्यम से ट्रांसफर का अनुरोध करें। EPFO का सिस्टम डुप्लीकेट UAN की पहचान कर पुराने Member ID को नए UAN से लिंक कर देता है।
EPF पर कितना ब्याज मिल रहा है?
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPFO ने 8.25% ब्याज दर बरकरार रखी है। यह लगातार तीसरा साल है, जब कर्मचारियों को इतनी ही ब्याज दर मिल रही है। हाल ही में EPFO ने सदस्यों के खातों में ब्याज भी जमा कर दिया है।
टैक्स और निकासी के नियम भी जानें
पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में कर्मचारी अपने EPF योगदान पर धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं। वहीं, नियोक्ता का 12% तक का योगदान भी तय सीमा के भीतर टैक्स-फ्री रहता है। अगर आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) करनी हो तो EPFO के नियमों के अनुसार खाते में कम से कम 25% राशि बनाए रखना जरूरी है, यानी आप अधिकतम 75% तक की रकम ही निकाल सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपके EPF खाते में कुल 2 लाख रुपये हैं, तो आप 1.5 लाख रुपये तक निकाल सकते हैं, जबकि 50,000 रुपये खाते में बने रहेंगे।
नौकरी बदलने के बाद पुराने PF खाते को नए खाते में ट्रांसफर करना एक समझदारी भरा कदम है। इससे आपका रिटायरमेंट फंड व्यवस्थित रहता है, टैक्स लाभ जारी रहते हैं और भविष्य में पेंशन से जुड़े फायदे भी सुरक्षित बने रहते हैं। आज की डिजिटल व्यवस्था में यह प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन पूरी की जा सकती है।
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