जेईई मेन्स 2026 के पहले सत्र का परिणाम आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया गया है. इस परीक्षा में छतरपुर के प्रिंस अहिरवार ने भी सफलता पाई है. प्रिंस ने इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है. साथ ही स्कूल और कोचिंग के टीचर्स को भी दिया. प्रिंस ने ये सफलता किसी बड़े शहर में रहकर नहीं बल्कि छोटे से शहर छतरपुर में रहकर ही पाई है. प्रिंस बताते हैं कि उन्हें इंजीनियर बनने के लिए दादा जी ने प्रेरित किया था.
छात्र प्रिंस अहिरवार का कहना है कि वह करारा गंज गांव से बिलोंग करते हैं. उनके पिता एक किसान हैं और वहीं मम्मी घर का काम देखती हैं.
उन्होंने आगे बताया कि घर में ऐसा माहौल नहीं था कि मैं इंजीनियर बन पाता लेकिन मेरे दादा बिहारी लाल जी ने मुझे बहुत प्रेरित किया. आज उनके मोटिवेशन की वजह से ही मेरा इंजीनियरिंग एग्जाम क्रैक हुआ है. दादा जी ने ही 11वीं कक्षा में साइंस स्ट्रीम लेने का सुझाव दिया था. हालांकि, दादाजी तो अब इस दुनिया में नहीं हैं. लेकिन उनका आशीर्वाद मेरे साथ है.
दूसरे प्रयास में करेंगे बेहतर प्रदर्शन
प्रिंस बताते हैं, ‘मैंने भी नहीं सोचा था कि मेरा पहले अटेम्प्ट में ही जेईई-मेन क्लीयर हो जाएगा. हालांकि, मैं अपने पर्सेंटाइल स्कोर से संतुष्ट नहीं हूं. मैंने जेईई-एडवांस के लिए तो क्वालीफाई कर लिया है लेकिन मुझे 91 परसेंटाइल में टॉप रैंकिंग का एनआईटी कॉलेज नहीं मिलेगा. इसलिए अभी और मेहनत करुंगा और सेकंड अटेम्प्ट में अच्छा प्रदर्शन कर आगे जेईई-एडवांस भी क्रैक करुंगा.’
किसान परिवार से आते हैं प्रिंस
प्रिंस का कहना है कि वह एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनकी माता का नाम पार्वती है तो पिता का नाम महिपाल अहिरवार है. उनके पिता एक किसान हैं और करारागंज गांव में रहकर खेती करते हैं. प्रिंस बताते हैं कि उन्होंने कक्षा 12वीं पिछले साल ही पास कर ली थी. इसके बाद कोचिंग ज्वाइन कर ली. वह ड्रॉपर स्टूडेंट रहे हैं. टीचर्स के गाइडेंस में जेईई-मेन में सफलता मिली.
छात्रों की सफलता पर टीचर ने क्या कहा
कोचिंग सेंटर के ओनर शैलेंद्र बताते हैं, ‘ मैं मैथ्स टीचर भी हूं. हमारे संस्था से प्रिंस और ध्रुव ने जेईई-मेन में सफलता पाई है. इस सफलता से पूरे छतरपुर जिले खुशी का माहौल है क्योंकि इन बच्चों ने किसी बड़े शहर नहीं बल्कि छतरपुर में रहकर ही सफलता हासिल की. इन दोनों बच्चों की सफलता आगे मील का पत्थर साबित होगी.’
परीक्षा की तैयारी कैसे की
प्रिंस बताते हैं कि स्कूल जाना होता नहीं था तो पूरे दिन कोचिंग में ही रहता था. सुबह 9 बजे कोचिंग चला जाता था और 3 बजे घर आता था. थोड़ा आराम करने के बाद फिर से पढ़ाई करने लगता था. डेली प्लान के टास्क कंप्लीट करता था. टीचर्स हर दिन प्लान देते थे. इस प्लान को पूरी तरह से एग्जीक्यूट करते थे. ध्रुव बताते हैं कि डेली बेसिस पर क्वेश्चन साल्व करना, होमवर्क करना और डाउट सेशन, इसी से मुझे सफलता मिली.
About the Author
Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें
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