इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अनिरुद्ध ने कहा कि उन्होंने चार-पांच बार पेज रिफ्रेश किया. उन्हें लगा कोई टेक्निकल गड़बड़ी है. वह कहते हैं, मैंने मार्क्स देखे और मुझे लगा कि यह अच्छा स्कोर है. पेपर अच्छे गए थे, लेकिन स्टैंडर्ड सितंबर से बेहतर था. सच कहूं तो मुझे रैंक की उम्मीद नहीं थी. रिजल्ट आया तो वह होली के लिए पांवटा साहिब में अपने घर पर थे. उनके माता-पिता उनके पीछे बैठे थे.
ICAI प्रेसिडेंट की कॉल के बाद आया यकीन
अनिरुद्ध बताते हैं कि उन्हें खुद के टॉप करने पर यकीन ICAI प्रेसिडेंट की कॉल के बाद आया. तब मुझे लगा कि यह सिर्फ मैं ही हूं, कोई और नहीं. इसके बाद परिवार का माहौल जश्न में बदल गया.
चंडीगढ़ से हुई स्कूलिंग
अनिरुद्ध हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पांवटा साहिब के रहने वाले हैं. जो एक मशहूर सिख तीर्थ स्थल है. हालांकि उनकी पढ़ाई कई शहरों में हुई है. उन्होंने साल 2020 में सीबीएसई बोर्ड से चंडीगढ़ में अपनी स्कूलिंग पूरी की. जिसमें उन्हें 97.75 परसेंट नंबर मिले. इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से BCom (ऑनर्स) किया, जिसके बाद उन्होंने ग्लोबल अकाउंटिंग फर्म अर्न्स्ट एंड यंग में अपनी आर्टिकलशिप शुरू की.
सीए इंटर में थे 538 नंबर
अनिरुद्ध ने सीए फाउंडेशन 400 में से 320 अंकों से पास किया था. इंटरमीडिएट के लिए, उन्होंने दोनों ग्रुप के लिए अलग-अलग एग्जाम दिए क्योंकि उनका कॉलेज अभी शुरू हुआ था, और वे एक सोसाइटी में शामिल हो गए थे. उन्होंने 800 में से कुल 538 नंबर हासिल किए.
2023 में शुरू की आर्टिकलशिप
अनिरुद्ध ने अप्रैल 2023 में EY गुड़गांव के एश्योरेंस डिवीज़न में अपनी आर्टिकलशिप शुरू की. उन्होंने जून 2023 के आखिर में अपनी फ़ाइनल-लेवल कोचिंग शुरू की. वे कहते हैं, “सिलेबस बहुत बड़ा है. अगर आप जल्दी शुरू नहीं करते हैं, तो आप पीछे रह जाते हैं. एश्योरेंस में होने का मतलब है पीक सीज़न से निपटना, इसलिए मैं स्टडी लीव से पहले अपनी क्लास खत्म करना चाहता था.” उन्होंने यह पक्का किया कि एग्ज़ाम से छह महीने पहले स्टडी लीव पर जाने से पहले सभी क्लास पूरी हो जाएं.
कैसे संभाला बर्नआउट और मेंटल प्रेशर
अनिरुद्ध बताते हैं कि बर्नआउट तो होना ही था. छह महीने बहुत बड़ा टाइम होता है. आप हर महीने कम से कम एक बार बर्नआउट महसूस करते हैं. ऐसे दिनों में, उन्होंने पूरी तरह से छोड़ने के बजाय सेल्फ-स्टडी कम कर दी. “मैं इसके बजाय लेक्चर देखता था. या कोई ऐसा सब्जेक्ट चुनता था जो मुझे पसंद हो — मुझे फाइनेंशियल मैनेजमेंट पसंद है-और कुछ सवाल सॉल्व करता था. इससे ब्रेक मिलता है लेकिन फ्लो नहीं टूटता.”
उनके सपोर्ट सिस्टम ने बहुत ज़रूरी रोल निभाया. उन्होंने दो-तीन दोस्तों का एक छोटा सर्कल बनाए रखा. उनमें से एक, उदय ने उसी एग्जाम में AIR 36 हासिल की, और दूसरी दोस्त, हिमांशी ने भी पास कर लिया. “हम एक-दूसरे की तैयारी को ट्रैक करते थे. अगर आपको बुरा लगता है, तो आप बात करते हैं. एक छोटा ग्रुप मदद करता है, एक बड़ा ग्रुप नहीं.”
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.