अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम आर्थिक फैसले के तहत सौर पैनल और सेमीकंडक्टर चिप बनाने में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण सामग्री के आयात पर नए शुल्क लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस कदम को अमेरिका की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और घरेलू उद्योग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार यह निर्णय वाणिज्य विभाग की करीब एक साल तक चली जांच के बाद लिया गया है।
बता दें कि जिस सामग्री पर यह फैसला लागू किया गया है, उसका उपयोग सौर पैनल और सेमीकंडक्टर चिप के निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता है। यही कारण है कि यह उत्पाद आधुनिक तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिका लंबे समय से इस क्षेत्र में विदेशी आपूर्ति पर निर्भर रहा है और अब सरकार इस स्थिति को बदलना चाहती है।
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हावर्ड लटनिक ने इस फैसले को घरेलू उद्योग के लिए जरूरी बताते हुए कहा कि अमेरिका में अंतिम उत्पाद तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन पूरी आपूर्ति व्यवस्था देश के भीतर विकसित नहीं हो पाई है। उनके अनुसार नए शुल्क का उद्देश्य कंपनियों को अमेरिका में ही उत्पादन और निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ऐसे कदम उठा रही है जिससे विदेशी कंपनियां बहुत कम कीमत पर सामान बेचकर घरेलू उद्योग को नुकसान न पहुंचा सकें।
मौजूद जानकारी के अनुसार सरकार ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि आयात पर कितना शुल्क लगाया जाएगा या न्यूनतम कीमत क्या तय की जाएगी। हालांकि माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन नियमों की पूरी जानकारी जारी की जाएगी।
गौरतलब है कि अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने जुलाई 2025 में इस मामले की जांच शुरू की थी। यह जांच 1962 के व्यापार विस्तार कानून की एक विशेष व्यवस्था के तहत की गई थी। इसी कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल पहले इस्पात, एल्युमिनियम, वाहन और अन्य कई उत्पादों के आयात पर शुल्क लगाने के लिए भी किया गया था।
हालांकि जांच में किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था में चीन की बड़ी हिस्सेदारी मानी जाती है। ऐसे में इस फैसले का असर चीन समेत कई निर्यातक देशों पर पड़ सकता है।
बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले वर्ष दोबारा सत्ता संभालने के बाद कई व्यापारिक साझेदार देशों पर अलग-अलग क्षेत्रों में शुल्क लगाए हैं। हालांकि इस साल फरवरी में अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ व्यापक शुल्कों को रद्द कर दिया था, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत लगाए गए क्षेत्र विशेष के शुल्क अब भी लागू हैं।
इसके अलावा पिछले महीने भी ट्रंप प्रशासन ने अलग कानूनी आधार का इस्तेमाल करते हुए करीब 60 व्यापारिक साझेदार देशों पर नए शुल्क लगाने का फैसला किया था। ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका अपनी व्यापार नीति को घरेलू उद्योग के हित में और अधिक सख्त बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा हैं।
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