बच्चे का भविष्य कैसा होगा, इसका कुछ हद तक अंदाजा उसके बिहेवियर और आदतों को देखकर भी लगाया जा सकता है। एक्सपर्ट की मानें तो अगर आपके बच्चे में ये 6 आदतें हैं, तो बहुत ज्यादा चांस हैं कि वो लाइफ में सफल जरूर होगा और कुछ बड़ा करेगा।
जिनका रूटीन कंसिस्टेंट होता है
जो बच्चे अपने रोज के रूटीन को काफी हद तक कंसिस्टेंट यानी सेम रखते हैं, उनमें आगे बढ़ने की अच्छी आदत दिखाई देती है। ऐसे बच्चे सिर्फ एग्जाम आने पर किताब नहीं खोलते, बल्कि सामान्य दिनों में भी पढ़ाई के लिए समय निकालते हैं। उनके खेलने, सोने, खाने और पढ़ने का एक लगभग तय समय होता है।
हर दिन बिल्कुल एक जैसा होना जरूरी नहीं है, लेकिन उनकी लाइफ पूरी तरह बिखरी हुई नहीं होती। वे अपने जरूरी कामों के लिए समय निकालना जानते हैं और एक काम को कई दिनों तक बिना वजह टालते नहीं रहते। ऐसे बच्चे किसी बड़े लक्ष्य के लिए सिर्फ कुछ दिनों तक मेहनत करके रुकने के बजाय धीरे-धीरे लगातार आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं।
जो बच्चा मोबाइल का एडिक्टेड नहीं है
जिस बच्चे की लाइफ मोबाइल के आसपास नहीं घूमती, उसमें भी आगे बढ़ने की एक अच्छी आदत दिखाई देती है। ऐसा बच्चा मोबाइल इस्तेमाल करता है, लेकिन हर खाली समय में फोन लेकर बैठ जाना उसकी आदत नहीं होती। फोन पर किसी का कॉल आए तो बात कर लेता है, किसी जरूरी काम के लिए मोबाइल इस्तेमाल कर लेता है और कभी-कभी मनोरंजन के लिए भी देख लेता है। लेकिन पढ़ाई, खेल या दूसरे कामों के बीच वह लगातार मोबाइल चेक करने में लगा नहीं रहता। ऐसे बच्चे मोबाइल को अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करते हैं, न कि मोबाइल के इस्तेमाल को अपनी पूरी रूटीन का हिस्सा बना लेते हैं।
जो बच्चा छोटे स्टेप्स की अहमियत समझता है
अच्छे फ्यूचर की तरफ बढ़ने वाले बच्चों की एक खास बात यह होती है कि वे बड़े लक्ष्य को छोटे-छोटे कामों में बांटकर देखते हैं। अगर कोई बच्चा आईएएस, जेई या बड़ा बिजनेसमैन बनने का सपना देखता है, तो उसे यह भी समझ होता है कि सिर्फ सपना देखने से लक्ष्य पूरा नहीं होगा। उसके लिए रोज पढ़ना, सीखना और अपनी तैयारी पर काम करना पड़ेगा।
ऐसा बच्चा यह नहीं सोचता कि आज बहुत सारा काम कर लूंगा और फिर कई दिनों तक कुछ नहीं करूंगा। वह रोज थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ने की कोशिश करता है। उसे पता होता है कि छोटे-छोटे स्टेप्स मिलकर ही बड़े लक्ष्य तक पहुंचाते हैं।
जो बच्चा इमोशनली स्टेबल रहता है
अगर बच्चा जीत या हार के बाद अपनी भावनाओं को संभालकर आगे बढ़ना सीख रहा है, ये भी अच्छा साइन है। इसका मतलब यह नहीं है कि उसे हारने पर दुख नहीं होना चाहिए या जीतने पर खुशी नहीं होनी चाहिए। खुशी और दुख होना बिल्कुल सामान्य है। फर्क यह है कि बच्चा इन भावनाओं में बहुत ज्यादा समय तक फंसा नहीं रहता। हार मिली तो उससे सीखकर आगे बढ़ता है और जीत मिली तो जरूरत से ज्यादा एक्साइटेड होकर अपनी बाकी जिम्मेदारियों को नहीं छोड़ता। वह धीरे-धीरे अपने काम और लक्ष्य की तरफ वापस लौट आता है।
जो बच्चा बड़ों का सम्मान करता है
बच्चे का बिहेवियर उसके व्यक्तित्व का एक अहम हिस्सा है। जो बच्चा अपने से बड़े लोगों की रिस्पेक्ट करता है और उनके अनुभव को समझने की कोशिश करता है, उसमें अच्छी सोच दिखाई देती है। ऐसा बच्चा सिर्फ अपनी बात कहने पर जोर नहीं देता, बल्कि सामने वाले की बात सुनने की कोशिश भी करता है। उसे यह समझ आने लगता है कि उससे बड़े लोगों के पास जिंदगी का ज्यादा अनुभव हो सकता है और उनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
जो बच्चा फिजिकली एक्टिव रहता है
जो बच्चा पढ़ाई और दूसरे कामों के साथ फिजिकली एक्टिव भी रहता है, उसमें एक अच्छा बैलेंस दिखाई देता है। ऐसा बच्चा दिनभर बेड पर पड़े रहने या कुर्सी पर बैठकर लगातार मोबाइल देखने के बजाय खेलने और फिजिकल एक्टिविटी के लिए भी समय निकालता है। वह अपनी पसंद के खेल में हिस्सा ले सकता है या किसी दूसरी एक्टिविटी के जरिए खुद को एक्टिव रख सकता है।
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