देहरादून के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) डॉ. आशीष चौहान ने रविवार सुबह एक बेहद भावुक और सराहनीय काम किया। उन्होंने थारू, बुक्सा और पूर्वोत्तर भारत के पिछड़े जनजातीय समुदायों से आए बच्चों के प्रति अपना लगाव और संवेदनशीलता दिखाई।
डीएम डॉ. चौहान झाझरा में स्थित ‘जनजातीय गुरुकुल आईटीआईटीआई दून संस्कृति स्कूल’ पहुंचे। वहां उन्होंने ‘विद्यारंभ संस्कार’ के साथ नए पढ़ाई के साल (शैक्षणिक सत्र) की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने बच्चों को नए स्कूल बैग और किताबें तोहफे में दीं। उन्होंने बच्चों से बहुत ही सरल और मजेदार अंदाज में बातचीत की और उन्हें मन लगाकर पढ़ने की सीख दी, जो बच्चों को बहुत पसंद आई।
इस खास जनजातीय गुरुकुल में खटीमा, सितारगंज से लेकर अरुणाचल प्रदेश के तवांग और नमसाई, इम्फाल, असम के कोकराझार और सोनितपुर, तमेंगलांग और राजस्थान के बांसवाड़ा तक के बच्चे पढ़ाई के लिए आए हैं। इस स्कूल के रजत जयंती समारोह का उद्घाटन उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने किया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्वोत्तर के उप-मुख्यमंत्री श्री चौना मेन ने भी अपना आशीर्वाद दिया था।
डॉ. आशीष चौहान के इस व्यवहार ने बच्चों और उनके माता-पिता का दिल जीत लिया। उन्होंने स्कूल के लिए स्मार्ट क्लास (डिजिटल बोर्ड) और खेल का सामान देने का वादा भी किया। पूर्व सांसद श्री तरुण विजय ने डीएम के इस जमीन से जुड़े व्यवहार की तारीफ की, वहीं स्कूल के डायरेक्टर श्री ऋत्विक ने उन्हें ‘जनता का डीएम’ कहते हुए धन्यवाद दिया।
इस पूरे काम में भारतीय सेना (विशेषकर उत्तर-पूर्वी हिस्से की स्पीयर कोर) और असम राइफल्स ने बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने सीमा पर रहने वाले जनजातीय बच्चों को अच्छी शिक्षा और देशभक्ति के संस्कार देने के लिए इस स्कूल में भेजा है। श्री तरुण विजय ने सेना की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय सेना सिर्फ देश की सीमा की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि वहां के नागरिकों के विकास और बेहतर भविष्य के लिए भी काम करती है, जो दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता।
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