ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म (जैसे ब्लिंकिट, जेप्टो) से सामान मंगाना महंगा हो सकता है। अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब ₹4 प्रति लीटर यानी 4% तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे स्विगी और इटर्नल (जोमैटो की पैरेंट कंपनी) जैसी कंपनियों पर डिलीवरी कॉस्ट का दबाव बढ़ गया है। इलायरा कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्यूल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ रहा है। इस अतिरिक्त खर्च का बोझ कंपनियां ग्राहकों पर डाल सकती हैं। इसके चलते आपके हर ऑर्डर के लिए लगने वाला डिलीवरी चार्ज या अन्य फीस बढ़ाई जा सकती है। जोमैटो-स्विगी ने मार्च में ही बढ़ाई थी प्लेटफॉर्म फीस 2023-2026 के बीच जोमैटो, स्विगी पर प्लेटफॉर्म फीस 9 गुना हो गई। जोमैटो ने 20 मार्च को ही अपनी प्लेटफॉर्म फीस 19% यानी ₹2.40 बढ़ाकर ₹14.90 (बिना GST) कर दी थी। वहीं, स्विगी ने 24 मार्च से हर ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 17% की बढ़ोतरी की थी। यूजर्स हर ऑर्डर पर 14 रुपए के बजाय अब 17.58 (GST सहित) यानी ₹3.58 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस दे रहे हैं। कंपनियों का खर्च हर ऑर्डर पर ₹1.20 तक बढ़ सकता है रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में क्विक कॉमर्स (10 मिनिट में डिलीवरी) के लिए कंपनियों का औसत डिलीवरी खर्च ₹35 से ₹50 प्रति ऑर्डर आता है। वहीं, फूड डिलीवरी के लिए यह खर्च ₹55 से ₹60 प्रति ऑर्डर के बीच आता है। कुल मिलाकर कंपनियों का मिला-जुला औसत खर्च (ब्लैंडेड कॉस्ट) इटर्नल के लिए ₹45 और स्विगी के लिए ₹55 प्रति ऑर्डर है। आमतौर पर कुल डिलीवरी कॉस्ट में फ्यूल का हिस्सा लगभग 20% होता है। इस हिसाब से प्रति ऑर्डर ईंधन की लागत ₹9 से ₹10 बैठती है। हाल ही में हुई 4% की बढ़ोतरी से कंपनियों को प्रति ऑर्डर करीब 44 पैसे का नुकसान हो रहा है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल के दाम ₹4 से बढ़कर ₹10 प्रति लीटर तक पहुंचते हैं, तो प्रति ऑर्डर यह दबाव ₹1 से ₹1.20 तक बढ़ जाएगा। स्विगी के मुनाफे पर पड़ सकता है 12% तक का असर अगर कंपनियां इस बढ़े हुए खर्च का बोझ ग्राहकों पर नहीं डालती हैं और इसे खुद झेलती हैं, तो उनके मुनाफे पर तगड़ा असर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे खराब स्थिति में वित्त वर्ष 2026-27 में इटर्नल के एडजस्टेड एबिटडा (EBITDA) पर 4% से 5% और स्विगी के मुनाफे पर 10% से 12% तक का निगेटिव असर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह प्रभाव स्विगी पर ज्यादा देखने को मिल सकता है, क्योंकि स्विगी अभी भी अपने क्विक कॉमर्स बिजनेस को ब्रेक-ईवन (मुनाफे की स्थिति) में लाने के लिए संघर्ष कर रही है। दूसरी तरफ, इटर्नल (जोमैटो) का स्केल काफी बड़ा है और उसके पास विज्ञापनों से होने वाली कमाई का एक मजबूत बेस है। साथ ही उसके ग्राहक थोड़े कम प्राइस-सेंसिटिव (कीमतों को लेकर संवेदनशील) हैं, जिससे वह लागत वसूलने में बेहतर स्थिति में है। गिग वर्कर्स बढ़ा सकते हैं भुगतान की मांग ईंधन की कीमतें बढ़ने का सीधा असर उन डिलीवरी पार्टनर्स (गिग वर्कर्स) पर पड़ता है जो अपनी बाइक से खाना या राशन डिलीवर करते हैं। पेट्रोल महंगा होने से उनकी दैनिक बचत कम हो जाती है। ऐसे में डिलीवरी पार्टनर्स कंपनियों से प्रति ऑर्डर मिलने वाले पेआउट (भुगतान) को बढ़ाने की मांग कर सकते हैं। अगर कंपनियां पेआउट नहीं बढ़ाती हैं, तो डिलीवरी पार्टनर्स के बीच असंतोष बढ़ सकता है और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। तीन तरीकों से बांटा जाएगा बढ़ी हुई कीमतों का बोझ रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में इटर्नल 2.7 अरब (270 करोड़) और स्विगी 1.4 अरब (140 करोड़) ऑर्डर्स को हैंडल कर सकती हैं। इतने बड़े स्तर पर आने वाले खर्च के बोझ को कंपनियां तीन अलग-अलग हिस्सों में बांट सकती हैं।
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