DU PhD Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने पीएचडी दाखिले के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब 4 साल का ग्रेजुएशन पूरा करने वाले मेधावी छात्र बिना मास्टर डिग्री के सीधे पीएचडी में एडमिशन ले सकेंगे।
मास्टर डिग्री की अब नहीं होगी अनिवार्यता
पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था के तहत किसी भी अभ्यर्थी को पीएचडी में दाखिला लेने के लिए 3 साल की स्नातक डिग्री और उसके बाद 2 साल की पोस्ट-ग्रेजुएशन (मास्टर्स) डिग्री पूरी करना अनिवार्य होता था। लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद, जिन छात्रों ने 8-सेमेस्टर (4 साल) का अंडरग्रेजुएट कोर्स पूरा किया है, वे बिना मास्टर डिग्री (MA, M.Sc, M.Com आदि) किए सीधे पीएचडी रिसर्च में दाखिला लेने के पात्र होंगे। इससे विद्यार्थियों का एक से दो साल का कीमती समय बचेगा और वे सीधे रिसर्च के क्षेत्र में कदम रख सकेंगे।
न्यूनतम 75% अंकों की अनिवार्य शर्त
हालांकि, 4 साल के ग्रेजुएशन के बाद सीधे पीएचडी में दाखिला पाना इतना आसान भी नहीं होगा। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस श्रेणी के तहत आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए कड़ी न्यूनतम अंक सीमा तय की है। चार साल की स्नातक डिग्री में अभ्यर्थी के कम से कम 75% अंक या इसके समकक्ष ग्रेडिंग (CGPA) होना अनिवार्य है।
आरक्षित वर्गों को छूट: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC नॉन-क्रीमी लेयर), दिव्यांगजन (PwBD) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम अंकों में 5% की छूट दी गई है। यानी इन वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए 4-वर्षीय स्नातक में 70% अंक होना आवश्यक है।
3-वर्षीय ग्रेजुएशन और PG करने वालों के लिए क्या हैं नियम?
डीयू ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुरानी 3-वर्षीय ग्रेजुएशन प्रणाली से पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों के लिए नियम पहले की तरह ही रहेंगे:
1-वर्षीय मास्टर डिग्री: यदि किसी छात्र ने 4-वर्षीय ग्रेजुएशन के बाद 1-वर्षीय मास्टर डिग्री की है, तो उसे मास्टर स्तर पर कम से कम 55% अंक (आरक्षित वर्ग के लिए 50%) लाने होंगे।
2-वर्षीय मास्टर डिग्री: 3-वर्षीय ग्रेजुएशन के बाद 2-वर्षीय मास्टर डिग्री पूरी करने वाले छात्रों के लिए भी पोस्ट ग्रेजुएशन में कम से कम 55% अंक की पात्रता बनी रहेगी।
M.Phil पास अभ्यर्थी: जिन विद्यार्थियों ने कम से कम 55% अंकों के साथ एम.फिल (M.Phil) कोर्सवर्क पूरा किया है, वे भी पीएचडी में प्रवेश के लिए पात्र होंगे।
प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू से होगा चयन
चार साल के ग्रेजुएशन के बाद सीधे पीएचडी में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा (जैसे UGC NET / CSIR NET या DU प्रवेश परीक्षा) उत्तीर्ण करनी होगी और उसके बाद संबंधित विभाग के इंटरव्यू प्रक्रिया से गुजरना होगा। डीयू के इस बड़े कदम से विश्वविद्यालय में रिसर्च के स्तर में सुधार होगा और प्रतिभाशाली युवा स्नातक स्तर से ही शोध एवं अनुसंधान (R&D) के क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकेंगे।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.