Malviya Nagar Hotel Fire: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 18 विदेशी नागरिक शामिल हैं. यह दर्दनाक हादसा हौज रानी इलाके की एक पांच मंजिला ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ इमारत में हुआ. शुरुआती जांच में आग लगने की वजह संदिग्ध सिलेंडर विस्फोट मानी जा रही है, हालांकि शॉर्ट सर्किट की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया है.
इस मामले में होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया गया है. इससे पहले लवकेश बजाज और उनकी पत्नी फरार थे. जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया था, ताकि वे देश छोड़कर भाग न सकें. उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार छापेमारी की जा रही थी. आइये इस घटना से जुड़ी पांच बड़ी बातें जानते हैं-
1-घटना के बाद उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने अधिकारियों के साथ आपात बैठक कर एक महीने का विशेष फायर सेफ्टी अभियान चलाने का आदेश दिया है. इसके तहत होटल, गेस्ट हाउस, नर्सिंग होम और कोचिंग संस्थानों की जांच की जाएगी. साथ ही अग्नि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों को सील करने के निर्देश दिए गए हैं.
2-बताया गया कि आग सुबह करीब 8:30 बजे ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ में लगी और तेजी से पूरी इमारत में फैल गई. इमारत में केवल एक ही प्रवेश और निकास द्वार था, खिड़कियां स्थायी रूप से बंद थीं और मुख्य दरवाजा सेंसर आधारित था, जिससे यह इमारत एक तरह से ‘मौत का जाल’ बन गई.
3-जांच में यह भी सामने आया है कि इमारत में बिना अनुमति अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं और अग्नि सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक मंजूरी भी नहीं ली गई थी. हादसे के दौरान धुएं और आग से बचने के लिए लोग खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश करते और मदद के लिए गुहार लगाते नजर आए. एक महिला अपने बच्चे के साथ तीसरी मंजिल से कूद गई, जबकि स्थानीय लोगों ने नीचे गद्दे बिछाकर कई लोगों को बचाने की कोशिश की.
4- होटल के सामने कंबल की दुकान के मालिक अरमान ने लोगों को कूदते देख उनकी चोट से बचाने के लिए तुरंत सड़क पर अधिक से अधिक रजाइयां और गद्दे बिछा दिए, जबकि अन्य लोगों ने घायलों को सीपीआर देकर मदद की. अरमान ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “उस समय हमने किसी और चीज के बारे में नहीं सोचा, बस जरूरत के अनुसार गद्दे और रजाइयां उपलब्ध कराईं.” एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी शेख अली ने बताया कि आग लगने के कारण दरवाजे बंद हो गए थे और खिड़कियां पूरी तरह से सील थीं, जिससे अंदर फंसे लोग काफी देर तक बाहर नहीं निकल सके. स्थानीय निवासियों के अनुसार, लोगों को बचाने के लिए खिड़कियां और मुख्य द्वार तोड़ने हेतु पत्थरों और हथौड़ों का इस्तेमाल किया गया.
5-एक अन्य निवासी आसिफ ने दावा किया कि इमारत में मौजूद अग्निशामक यंत्र इतनी बड़ी आग से निपटने के लिए अपर्याप्त थे. सड़क के उस पार स्थित मैक्स अस्पताल में घबराए और स्तब्ध परिजन अपने प्रियजनों की तलाश में इकट्ठा हो गए. वे घायल और मृतकों की सूची खंगालते रहे और लगातार फोन करते रहे. एक व्यक्ति ने रोते हुए कहा, “तस्वीरों से हम उन्हें पहचान नहीं पा रहे, सभी बुरी तरह झुलस गए हैं.” इन्हीं लोगों में शामिल नमित गोयल ने बताया कि उनके छह रिश्तेदार इस हादसे की चपेट में आ गए, जिनमें से चार की पहचान हो चुकी है, जबकि दो की पहचान अभी बाकी है.
मैक्स अस्पताल के अनुसार, वहां लाए गए 39 लोगों में से 18 को मृत घोषित किया गया, जबकि 15 को आईसीयू में भर्ती कराया गया, जिनमें से आठ वेंटिलेटर पर हैं और उनकी हालत गंभीर है. कई लोग धुएं के कारण सांस लेने में दिक्कत से जूझ रहे थे, कुछ मामूली रूप से झुलसे थे और कुछ को फ्रैक्चर हुआ था. पांच घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि एक गंभीर रूप से झुलसे मरीज को सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया.
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 13 मरीज भर्ती किए गए, जिनमें से तीन इमारत से कूदने के कारण घायल हुए थे. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, बचाव कार्य के दौरान 10 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए. इस घटना पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई.
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