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हम अक्सर सोचते हैं कि करोड़पति बनने के लिए बड़ी सैलरी या मोटा निवेश जरूरी है। लेकिन निवेश की दुनिया में कई बार छोटी रकम और लंबा समय बड़ा कमाल कर देते हैं। रोजाना सिर्फ ₹100 का निवेश करके बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है।
इसके लिए सबसे जरूरी है नियमित निवेश की आदत और धैर्य। कई लोग निवेश इसलिए शुरू नहीं कर पाते, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं। जबकि फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेश की शुरुआत रकम से नहीं, बल्कि अनुशासन से होती है।
इसलिए आज ‘आपका पैसा’ में जानेंगे कि सिर्फ 100 रुपए निवेश करके बड़ा फंड कैसे बनाएं। साथ ही जानेंगे कि-
- सिर्फ 100 रुपए के निवेश से 10, 20 और 30 साल में कितना फंड बन सकता है?
- आय बढ़ने पर कितना निवेश बढ़ाएं और किन गलतियों से बचें?
एक्सपर्ट- कुशाग्र मोहन, फाइनेंशियल एक्सपर्ट, को-फाउंडर, निक्सेपा कैपिटल, लखनऊ
सवाल- क्या रोज ₹100 की बचत से निवेश शुरू करना सही रणनीति है?
जवाब- हां, खासकर उन लोगों के लिए, जो कम रकम की वजह से निवेश शुरू नहीं कर पाते हैं। रोज ₹100 यानी महीने के करीब ₹3,000 होते हैं। इस रकम को नियमित रूप से निवेश करने पर समय के साथ अच्छा फंड तैयार किया जा सकता है।
सवाल- किन लोगों को रोज ₹100 से निवेश की शुरुआत करनी चाहिए?
जवाब- यह उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है, जो एक साथ बड़ी रकम नहीं लगा सकते। खासकर स्टूडेंट्स और गृहिणियां छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं। यह किन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- रोज ₹100 कहां निवेश करें, किस विकल्प में बेहतर रिटर्न मिल सकता है?
जवाब- सही विकल्प आपके लक्ष्य, निवेश की अवधि और रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर करता है। इसे पॉइंटर्स से समझिए-
SIP (इक्विटी म्यूचुअल फंड)
- हर महीने छोटी रकम से नियमित निवेश किया जा सकता है।
- लंबे समय में पैसा बढ़ाने का अच्छा ऑप्शन है।
- कंपाउंडिंग का फायदा मिलने से समय के साथ बड़ा फंड बनाने में मदद मिलती है।
- रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है, इसलिए यह फिक्स नहीं होता।
- लंबे समय तक निवेश करने पर बाजार की गिरावट और तेजी, दोनों दौर का फायदा मिल सकता है।
PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड)
- सरकार समर्थित लंबी अवधि की सेविंग स्कीम है।
- ब्याज दर सरकार तय करती है।
- निवेश की अवधि 15 साल होती है।
- बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर नहीं पड़ता।
- लंबे समय के सुरक्षित निवेश के लिए बेहतर ऑप्शन है।
RD (रेकरिंग डिपॉजिट)
- हर महीने तय रकम जमा करनी होती है।
- ब्याज दर पहले से तय रहती है।
- बाजार से जुड़ा रिस्क नहीं होता।
- छोटी अवधि के तय लक्ष्य और नियमित बचत के लिए उपयोगी है।
- समय से पहले बंद करने पर बैंक के नियम लागू होते हैं।
FD (फिक्स डिपॉजिट)
- एकमुश्त रकम जमा की जाती है।
- ब्याज दर निवेश के समय तय हो जाती है।
- बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं होता।
- समय से पहले पैसा निकालने की सुविधा मिल सकती है, लेकिन पेनल्टी लग सकती है।
- रोज ₹100 बचाने की बजाय बड़ी रकम इकट्ठा करके FD करना होगा।
क्या बेहतर?
- ज्यादा रिटर्न चाहते हैं और लंबे समय तक निवेश कर सकते हैं तो इक्विटी SIP कर सकते हैं।
- कम रिस्क और तय घोषित ब्याज चाहते हैं तो RD या PPF बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
- अगर एकमुश्त रकम लगाना चाहते हैं तो FD बेहतर विकल्प है।
सवाल- अगर रोज ₹100 निवेश करें तो 10, 20 और 30 साल में कितना फंड बन सकता है?
जवाब- रोज ₹100 यानी महीने के करीब ₹3,000 नियमित निवेश करने पर लंबे समय में कंपाउंडिंग से बड़ी रकम तैयार हो सकती है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर ₹100 की जगह ₹150 या ₹200 रोज बचाएं, तो कितना बड़ा फर्क पड़ेगा?
जवाब- रोज की निवेश राशि में सिर्फ ₹50 या ₹100 की बढ़ोतरी छोटी लग सकती है, लेकिन लंबे समय में इसका असर काफी बड़ा होता है। इसकी वजह यह है कि आप हर महीने ज्यादा पैसा निवेश करते हैं और उस अतिरिक्त रकम पर भी समय के साथ रिटर्न मिलता रहता है। उदाहरण के लिए-
- रोज ₹100 की जगह ₹150 निवेश करने पर मासिक निवेश ₹3,000 से बढ़कर ₹4,500 हो जाएगा।
- ₹200 रोज निवेश करने पर यह ₹6,000 हो जाएगा।
अगर लंबे समय तक निवेश जारी रहे और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिले, तो यही बढ़ी हुई रकम 20-30 साल में फंड में लाखों रुपए का अंतर पैदा कर सकती है। ग्राफिक में देखिए-

डेली ₹200 निवेश का अनुमानित आंकड़ा नीचे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या हर वित्तीय लक्ष्य के लिए ₹100 रोज की बचत काफी है?
जवाब- नहीं, ₹100 रोज से निवेश की शुरुआत की जा सकती है, लेकिन यह हर लक्ष्य के लिए पर्याप्त नहीं है। इसे ऐसे समझिए-
छोटे लक्ष्य: ट्रैवल, गैजेट या बाइक के डाउन पेमेंट जैसे लक्ष्यों के लिए ₹100 रोज से निवेश की शुरुआत की जा सकती है।
बच्चों की पढ़ाई: पढ़ाई का खर्च समय के साथ बढ़ता है। इसलिए ₹100 से शुरुआत कर सकते हैं, लेकिन आगे निवेश की रकम बढ़ानी होगी।
घर खरीदना: घर के डाउन पेमेंट जैसे बड़े लक्ष्य के लिए सिर्फ ₹100 रोज पर्याप्त नहीं होगा। कमाई बढ़ने के साथ निवेश भी बढ़ाना जरूरी होगा।
रिटायरमेंट: यह लंबी अवधि और बड़ी रकम वाला लक्ष्य है। ₹100 रोज शुरुआती निवेश हो सकता है। लेकिन रिटायरमेंट के लिए समय के साथ निवेश बढ़ाना जरूरी है।
सवाल- अगर आय बढ़े, तो ₹100 की बचत कब और कितनी बढ़ानी चाहिए?
जवाब- आमतौर पर हर साल निवेश की रकम 10% तक बढ़ाने से शुरुआत की जा सकती है। इसे स्टेप-अप SIP कहते हैं। इसमें निवेश की रकम हर साल एक तय प्रतिशत या रकम से बढ़ाई जाती है।
जैसे-
- अभी रोज ₹100 यानी महीने के करीब ₹3,000 निवेश कर रहे हैं, तो अगले साल इसे करीब ₹3,300 महीने किया जा सकता है।
- आय में ज्यादा बढ़ोतरी हुई है और खर्च कम हैं, तो निवेश इससे ज्यादा भी बढ़ाया जा सकता है।

सवाल- क्या ₹100 रोज की बचत को बीच में रोकने से नुकसान हो सकता है?
जवाब- हां, इससे लंबे समय में बनने वाला फंड कम हो सकता है। इसकी मुख्य वजह कंपाउंडिंग का फायदा कम होना है। कंपाउंडिंग का मतलब है कि आपके लगाए पैसे पर रिटर्न मिलता है और फिर उस बढ़ी हुई रकम पर भी आगे रिटर्न मिलता रहता है।
मान लीजिए,
- आप हर महीने ₹3,000 निवेश करते हैं। लगातार निवेश करने पर आपका कुल निवेश ₹3,000, ₹6,000, ₹9,000, ₹12,000… करते हुए लगातार बढ़ता जाता है।
- बीच में निवेश रोकने पर नई रकम जुड़ना बंद हो जाएगी। यानी उस रकम को बढ़ने और उस पर रिटर्न कमाने का मौका ही नहीं मिलेगा।
सवाल- ₹100 रोज निवेश करने वालों की सबसे बड़ी गलतियां क्या हैं?
जवाब- छोटी रकम से निवेश शुरू करना अच्छी बात है, लेकिन कुछ गलतियां लंबे समय में बनने वाले फंड पर असर डाल सकती हैं। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या छोटी रकम से निवेश शुरू करने पर भी समय-समय पर पोर्टफोलियो रिव्यू करना जरूरी है?
जवाब- हां, निवेश की रकम छोटी हो या बड़ी, समय-समय पर उसका रिव्यू करना जरूरी है। इससे पता चलता है कि-
- निवेश आपके लक्ष्य के हिसाब से सही दिशा में बढ़ रहा है या नहीं।
- यह भी देख सकते हैं कि जिस फंड या स्कीम में पैसा लगाया है, उसका प्रदर्शन कैसा है और वह रिस्क उठाने की क्षमता के मुताबिक है या नहीं।
- आमतौर पर साल में एक बार पोर्टफोलियो का रिव्यू किया जा सकता है।
- इसके अलावा आय, लक्ष्य या आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव होने पर भी इन्वेस्टमेंट का रिव्यू करना बेहतर है।
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ग्राफिक्स- विपुल शर्मा
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