Crude Oil Price Fall Today: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच एक दिन पहले यानी मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली. ईरान-इजरायल विवाद से पैदा हुए हालात और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल सोमवार को इंट्राडे में 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था. हालांकि, मंगलवार सुबह यह लगभग 10.17 प्रतिशत गिरकर 85.15 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया था.
इससे एक दिन पहले पिछले कारोबारी सेशन में तेल की कीमतें साल 2022 के बाद पहली बार इतने हाई लेवल पर पहुंची थी. इसलिए अचानक आयी इस गिरावट से बाजार को भी सहारा मिला है. आइए जानते हैं, आखिर इतनी तेज गिरावट क्यों दर्ज की गई है?
ट्रंप के बयान के बाद बाजार में नरमी
तेल की कीमतों में आई इस कमजोरी के पीछे डोनाल्ड ट्रंप के हाल ही में दिए गए संकेत को माना जा रहा है. ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव जल्द खत्म हो सकता है. इसी दौरान वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी करीब 10.06 प्रतिशत गिरकर 85.25 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बीच व्लादिमीर पुतिन और ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत भी हुई, जिसे हालात शांत कराने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
एलपीजी सप्लाई को लेकर तेल कंपनियों की प्राथमिकता
भारत पेट्रोलियम ने कहा है कि घरेलू एलपीजी की सप्लाई को सबसे पहले प्राथमिकता दी जा रही है. वैश्विक हालात के कारण ईंधन और एलपीजी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है. इसलिए घरों में गैस की कमी न हो इसके लिए एलपीजी उत्पादन बढ़ाया जा रहा है. अस्पताल, स्कूल और अन्य जरूरी संस्थानों को भी जरूरत के हिसाब से एलपीजी दी जाएगी.
गैर-घरेलू सेक्टर की मांग को देखने के लिए तेल कंपनियों की एक कमेटी बनाई गई है. जिसमें इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अधिकारी शामिल हैं. यह कमेटी तय करेगी कि किस सेक्टर को कितनी एलपीजी दी जाए, क्योंकि गैर-घरेलू एलपीजी की सप्लाई काफी हद तक आयात पर निर्भर है और ऐसे में हर मांग को पूरा कर पाना संभव नहीं होता है.
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