Ravindra Jain Superhit Songs : हाल ही में होली के त्योहार में नदिया के पार फिल्म का गाना ‘जोगी जी धीरे-धीरे, नदी के तीरे-तीरे’ खूब सुनाई दिया. ‘नदिया के पार’ फिल्म 10 अक्टूबर 1982 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. यह मूवी इसलिए भी खास है क्योंकि इसी फिल्म की कहानी को आधुनिक अंदाज में ‘हम आपके हैं कौन’ में पेश किया गया. सलमान खान-माधुरी दीक्षित स्टारर ‘हम आपके हैं कौन’ फिल्म ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई. सबसे दिलचस्प बात यह है कि ‘नदिया के पार’ मूवी के कंपोजर ने ही रामानंद सागर की कालजयी रामायण के गाने लिखे थे. म्यूजिक कंपोज किया था. यह संगीतकार कौन था, आइये जानते हैं…..
कुछ फिल्में ऐसी होती है जो बहुत ही पारिवारिक होती है. इन फिल्मों को कितनी बार देखा जाए मन नहीं भरता. ऐसी ही एक फिल्म 1982 में सिनेमाघरों में आई थी. फिल्म का म्यूजिक बहुत ही मधुर था. इसी में होली का एक गाना भी था जो हर साल हमें रंगों के त्योहार में सुनने को मिल जाता है. इस साल भी ‘जोगी जी धीरे-धीरे, नदी के तीरे-तीरे’ गाने की धूम होली में रही. इस गाने को लिखने वाले म्यूजिक कंपोजर ने ही आगे चलकर रामानंद सागर के कालजयी धारावाहिक ‘रामायण’ का गीत-संगीत तैयार किया था. वो महान संगीतकार-गीतकार रवींद्र जैन थे.

नदिया के पार फिल्म राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले बनी थी और इसका डायरेक्शन गोविंद मूनिस ने किया था. कहानी कोहबर की शर्त उपन्यास से ली गई थी. यह उपन्यास केशव प्रसाद मिश्रा ने लिखा था. प्रोड्यूसर ताराचंद बड़जात्या थे. फिल्म में सचिन पिलगांवकर और साधना सिंह लीड रोल में थे.

रवींद्र जैन ने बॉलीवुड में अपनी अलग छाप छोड़ी. मूल रूप से अलीगढ़ के रहने वाले रवींद्र जैन पांच रेडियो स्टेशनों से रिजेक्ट होने के बाद 1969 में मुंबई पहुंचे थे. खूब संघर्ष किया. 1973 में आई फिल्म ‘सौदागर’ से पहचान मिली. इस फिल्म का म्यूजिक और गीत उन्होंने लिखे थे. फिर उन्होंने ‘चितचोर’ और ‘अंखियों के झरोखे से’ जैसी फिल्मों के जरिए हिंदी सिनेमा में मधुर गीतों की मिसाल कायम की.
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रवींद्र जैन ने फिल्मों के अलावा, रामानंद सागर के कालजयी धारावाहिक रामायण (1987), श्रीकृष्णा (1993), अलिफ लैला (1993), जय वीर हनुमान (1995), जय हनुमान (1997), और रामयण (2008) जैसे पॉप्युलर टीवी सीरियल्स के गीत-संगीत कंपोज किया. 80 के दशक में रामायण की पॉप्युलैरिटी तो फिल्मों से भी ज्यादा थी.

रामायण का प्रसारण दूरदर्शन पर 1987 से 1988 के बीच हुआ था. यह सबसे ज्यादा देखी जानी टीवी सीरीज है. इस शो का रिपीट टेलीकास्ट 17 देशो में 20 अलग-अलग चैनलों पर हुआ था. हर एपिसोड पर डीडी नेशनल को उस समय ₹40 लाख रुपये का प्रॉफिट हुआ था.

प्रसिद्ध संगीतकार रवींद्र जैन को बॉलीवुड में सबसे बड़ा ब्रेक दिग्गज निर्देशक राज कपूर ने दिया. ‘राम तेरी गंगा मैली’ (1985) के सुपरहिट संगीत ने उन्हें शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचाया. रविंद्र जैन और राज कपूर साहब की पहली मुलाकात ‘दो जासूस’ फिल्म के म्यूजिक के रिकॉर्डिंग के दौरान हुई थी. राज साहब ने इस फिल्म के गीत पास किए थे.

दोनों की एक और मुलाकात दिल्ली में एक शादी के कार्यक्रम में हुई. इस कार्यक्रम में रविंद्र ने एक भजन ‘एक राधा एक मीरा, दोनों ने श्याम को चाहा…’ सुनाया था. यह भजन राज कपूर को बहुत पसंद आया था. उन्होंने सवा रुपये देकर यह भजन उसी समय अपनी अगली फिल्म के लिए ले लिया था. यह गाना हमें ‘राम तेरी गंगा मैली’ में सुनाई दिया था.

रविंद्र जैन ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि कैसे ‘हिना’ फिल्म के गाने कंपोज करने से पहले राज कपूर उन्हें पूरे 25 दिन के लिए कश्मीर ले गए थे. दरअसल, राज कपूर ने पहले रवींद्र जैन को घर पर बुलाया. ‘ओ मैया मोरी, का ठानी मन में, राम सिया भेज दए री बन में…’ भजन सुनते ही राज कपूर ने कहा कि अब आप मेरी ‘हिना’ फिल्म में काम नहीं कर सकते. फिर एक दिन अचानक उनका कश्मीर के लिए मैसेज आया. कश्मीर में हम 25 दिन रहे लेकिन म्यूजिक का कोई जिक्र नहीं हुआ. जब रवींद्र जैन वापस मुंबई आए तो पता चला कि रामायण को दिल से निकालने के लिए उन्होंने ऐसा किया था.
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