भारत के सर्वेश कुशारे और एंसी सोजन ने रविवार को यहां एशियाई खेलों में क्रमश: पुरुष ऊंची कूद और महिला लंबी कूद फाइनल में स्वर्ण पदक की उम्मीद जगाईं लेकिन अंत में उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा जिससे देश ने एथलेटिक्स में पांच पदक अपनी झोली में डाले। डेकाथलीट तेजस्विन शंकर, पारुल चौधरी ने महिला 3000 मीटर स्टीपलचेज में और 200 मीटर की धाविका हरिता भद्रा ने कांस्य पदक जीता जिससे मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में भारत के एथलेटिक्स में कुल पदकों की संख्या 13 (छह रजत, सात कांस्य) हो गई। लगातार दूसरे दिन भी रुक-रुक कर बारिश होती रही।
प्रतियोगिता खत्म होने में दो दिन बचे हैं लेकिन भारत की 75 सदस्यीय मजबूत एथलेटिक्स टीम को अब भी स्वर्ण की तलाश में है। ट्रैक एवं फील्ड में रविवार को पांच पदक के साथ भारत के कुल 37 पदक हो गए हैं जिसमें चार स्वर्ण, 16 रजत और 17 कांस्य पदक शामिल हैं। महिला लंबी कूद फाइनल में एंसी ने 6.53 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया और दूसरे स्थान पर रहीं।
चीन की हुआंग यिंगयिंग ने आखिरी प्रयास में 6.55 मीटर की कूद लगाकर भारतीय खिलाड़ी को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। निराश एंसी ने कहा, ‘‘ दो सेंटीमीटर से चूकने का थोड़ा दुख है। आखिरी क्षण तक मैं स्वर्ण पदक जीतने की दौड़ में थी।
लेकिन किस्मत कुछ और थी। आज मेरा दिन नहीं था। एंसी के नाम 6.88 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन एक बात के लिए मैं खुश हूं। यह मेरे दूसरे एशियाई खेल हैं और दोनों में मैं पदक विजेता हूं। यह मेरे लिए अंत नहीं है।
मैं और मजबूत होकर वापसी करूंगी। ’’
हालांकि एंसी की हमवतन शैली सिंह के लिए महिला लंबी कूद फाइनल में निराशा हाथ लगी। चीन की मेंगयी तान ने 6.46 मीटर की कूद लगाकर भारतीय खिलाड़ी को पीछे छोड़ दिया जिससे शैली कांस्य पदक से चूक गईं।
एंसी ने पांचवें प्रयास में 6.53 मीटर की कूद लगाई थी लेकिन यिंगयिंग ने 6.55 मीटर की कूद के साथ अंतिम प्रयास में उन्हें पीछे छोड़ दिया। शैली का दिन का सर्वश्रेष्ठ प्रयास 6.42 मीटर रहा। सर्वेश स्पर्धा में काफी समय तक शीर्ष पर रहे लेकिन 2.25 मीटर की ऊंचाई को पहली कोशिश में पार नहीं कर पाने के बाद दूसरे स्थान पर खिसक गए।
चीनी ताइपे के चाओ शुआन फू ने यह ऊंचाई अपनी पहली कोशिश में पार कर ली। हालांकि कुशारे ने दूसरी कोशिश में 2.25 मीटर की ऊंचाई पार कर ली। उन्होंने कहा, ‘‘यह पदक मेरे लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि ऐसे खेल चार साल बाद आते हैं।
आप कभी नहीं जानते कि चार साल में क्या होगा। ’’
कुशारे चीन में हुए पिछले चरण में चौथे स्थान पर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भी रजत पदक जीता था, इसलिए मैं स्वर्ण जीतना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं कर सका।
लेकिन मैं संतुष्ट हूं कि पदक आया है। इससे आगे बढ़ने में मेरा आत्मविश्वास बढ़ेगा। ’’
डेकाथलीट शंकर ने पिछले चरण में जीते रजत पदक में एक कांस्य पदक और जोड़ दिया।
उन्होंने दो दिनों तक चली इस कठिन 10 खेलों की स्पर्धा में 7934 अंक जुटाए। जापान के मारुयामा ने 8123 अंकों के साथ स्वर्ण जीता जबकि चीन के चेन एक्स ने 8012 अंक जुटाकर रजत पदक जीता। शंकर ने कहा, ‘‘यह कांस्य जीतने से ज्यादा रजत हारने जैसा था।
’’
उनका राष्ट्रीय रिकॉर्ड 8057 अंकों का है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस साल डेकाथलॉन की चार प्रतियोगिता में हिस्सा लिया है। मैं 30 जनवरी से लगातार यही कर रहा हूं लेकिन किसी को दोष नहीं दे रहा।
मुझे यह करना ही था और मुझे वह प्रदर्शन हासिल करना था। ’’
पिछले एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली पारुल ने नौ मिनट 8.67 सेकेंड के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ लगातार दूसरी बार कांस्य पदक अपने नाम किया। बहरीन की विनफ्रेड यावी ने नौ मिनट 4.36 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि कजाखस्तान की नोराह जेरुतो तनुई ने नौ मिनट 06.82 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक अपने नाम किया।
स्पर्धा में हिस्सा लेने वाली एक अन्य भारतीय एथलीट अंकिता नौ मिनट 19.24 सेकेंड के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ चौथे स्थान पर रहीं। इससे पहले भारत की हरिता भद्रा ने महिला 200 मीटर में 23.20 सेकेंड के समय के साथ कांस्य पदक जीता। भद्रा तीसरे स्थान पर रहीं।
वह जापान की इडो अबिगेइरुफुका से मामूली अंतर से आगे रहीं जिन्होंने 23.21 सेकेंड का समय निकाला। महिला 200 मीटर फाइनल में सिंगापुर की शांति परेरा ने सत्र का सर्वश्रेष्ठ 22.78 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता जबकि चीन की चेन युजी ने 22.93 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक हासिल किया। फाइनल में शामिल एक अन्य भारतीय उन्नति अयप्पा बोलैंड 23.48 सेकेंड के समय के साथ छठे स्थान पर रहीं।
अन्य स्पर्धाओं में लंबी कूद के खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर और डेविड सोलोमन, 400 मीटर बाधा दौड़ के खिलाड़ी संतोष तमिलरसन, विथ्या रामराज और अनु राघवन ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं के फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। श्रीशंकर ने 7.84 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर क्वालीफिकेशन में दूसरा स्थान हासिल किया जबकि सोलोमन की 7.62 मीटर की छलांग ने उन्हें सातवें स्थान पर रखा और दोनों ने पुरुषों की लंबी कूद के फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। पुरुषों की 400 मीटर बाधा दौड़ में संतोष ने 49.61 सेकंड के समय के साथ शुरुआती हीट में दूसरा स्थान हासिल कर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया।
हालांकि दूसरी हीट में प्रतिस्पर्धा कर रहे यशस पलाक्षा ने पहली बाधा पार करने से पहले ही दौड़ रोक दी और दौड़ पूरी नहीं कर सके। दोनों भारतीय महिलाएं अपनी-अपनी हीट में दूसरे स्थान पर रहने के बाद 400 मीटर बाधा दौड़ में स्वतः आगे बढ़ गईं। विथ्या ने 55.73 सेकेंड का समय दर्ज किया जबकि अनु ने 55.84 सेकेंड का समय लिया।
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