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गर्मियों में टेम्परेचर बढ़ने पर थकान, कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं कॉमन हैं। हमारे शरीर के सभी ऑर्गन्स की सही फंक्शनिंग के लिए खास बॉडी टेम्परेचर (लगभग 37°C) की जरूरत होती है।
गर्मियों में ये बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे हीट से जुड़ी परेशानियां बढ़ जाती हैं। गलत खानपान से ये समस्याएं और बढ़ सकती हैं। सही फूड चॉइस से इससे निपटने में मदद मिलती है।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि-
- कौन से फूड्स बॉडी को कूल रखते हैं?
- गर्मियों में कौन-से फूड्स नहीं खाने चाहिए?
- कूलिंग फूड्स लेने का सही समय और तरीका क्या है?
एक्सपर्ट: डॉ. अमृता मिश्रा, सीनियर डाइटीशियन, दिल्ली
सवाल- गर्मियों में बाहर का तापमान बढ़ने पर शरीर का तापमान भी बढ़ता है। ऐसे में शरीर उस गर्मी से कैसे डील करता है?
जवाब- शरीर अपने सामान्य तापमान (लगभग 37°C) को बनाए रखने के लिए ऑटोमैटिक सिस्टम पर काम करता है। इसे ‘थर्मोरेगुलेशन’ कहा जाता है। पॉइंटर्स से इसे समझते हैं-
- शरीर पसीना बनाता है। पसीना सूखने की प्रक्रिया (इवैपोरेशन) से बॉडी टेम्परेचर कम होता है।
- गर्मियों में स्किन की ब्लड वेसल्स फैल जाती हैं। इससे स्किन लेयर की तरफ ब्लड फ्लो बढ़ जाता है, जिससे हीट बाहर निकलती है।
- हार्ट तेजी से ब्लड पंप करता है। इससे बॉडी हीट जल्दी बाहर निकलती है।
सवाल- गर्मियों शरीर को ठंडा रखना क्यों जरूरी है?
जवाब- गर्मियों में बॉडी टेम्परेचर कंट्रोल न किया जाए तो-
- डिहाइड्रेशन, थकान, चक्कर, हीट एग्जॉशन, हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- इससे एनर्जी लेवल कम होता है और पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है।
- ज्यादा गर्मी से शरीर के वाइटल ऑर्गन्स ब्रेन, हार्ट और किडनी का कामकाज प्रभावित होता है।
सवाल- शरीर को भीतर से ठंडा रखने के लिए क्या करना चाहिए?
जवाब- इसके लिए कुछ बातों का ख्याल रखें। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- कौन-कौन से फूड्स शरीर को भीतर से ठंडा रखने में मदद करते हैं?
जवाब- पानी से भरपूर फूड्स शरीर में ठंडक बनाए रखने में मदद करते हैं। ग्राफिक में इनकी लिस्ट देखिए-

सवाल- क्या ठंडे फूड का मतलब ‘फ्रिज में रखी हुई ठंडी चीजें’ हैं?
जवाब- नहीं, ‘कूलिंग फूड’ यानी जो शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं और जिनकी तासीर ठंडी होती है। उदाहरण के लिए-
- तरबूज, खीरा, ककड़ी, दही और छाछ जैसे फूड्स की तासीर ठंडी होती है।
- ये शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और बॉडी टेम्परेचर बैलेंस रखने में मदद करते हैं।
- वहीं कोल्ड ड्रिंक्स, कोल्ड कॉफी या फ्रिज का ज्यादा ठंडा पानी कुछ मिनट के लिए ठंडक देते हैं, लेकिन ये शरीर को अंदर से कूल नहीं करते हैं।
सवाल- कूलिंग फूड्स बॉडी टेम्परेचर को कैसे कंट्रोल करते हैं?
जवाब- ये कई तरीकों से बॉडी टेम्परेचर बैलेंस करने में मदद करते हैं।
- इनमें पानी के साथ जरूरी मिनरल्स (जैसे पोटेशियम और सोडियम) होते हैं।
- ये शरीर में फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखते हैं। इससे कमजोरी, चक्कर या ओवरहीटिंग का रिस्क कम होता है।
- ये फूूड्स डाइजेशन को भी सपोर्ट करते हैं, जिससे शरीर का ओवरऑल टेम्परेचर बैलेंस्ड रहता है।
सवाल- क्या ये कूलिंग फूड बॉडी को डिहाइड्रेशन से बचाते हैं?
जवाब- हां, इनमें पानी की भरपूर मात्रा होती है। इससे शरीर में फ्लूइड बैलेंस बना रहता है और बार-बार प्यास भी नहीं लगती है।
सवाल- शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में इन फूड की क्या भूमिका होती है?
जवाब- इनमें पानी के साथ जरूरी मिनरल्स (सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम) पर्याप्त मात्रा में होते हैं, जो पसीने से निकलने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करते हैं।
साथ ही ये सेल्स में फ्लूइड बैलेंस बनाए रखते हैं और नर्व्स व मसल्स के सही कामकाज में मदद करते हैं।

सवाल- क्या ये कूलिंग फूड हीट स्ट्रोक (लू) से बचा सकते हैं?
जवाब- कूलिंग फूड्स लू से बचा सकते हैं, लेकिन ये पूरी सुरक्षा नहीं देते। अगर धूप में ज्यादा समय बिताते हैं और पानी कम पीते हैं तो सिर्फ फूड्स से बचाव नहीं होगा।
सवाल- क्या गर्मी से बचने के लिए सिर्फ ठंडी तासीर वाली चीजें खाना पर्याप्त है?
जवाब- नहीं, सिर्फ कूलिंग फूड्स खाना ही काफी नहीं है। गर्मी से बचने के लिए संतुलित डाइट, पर्याप्त पानी और सही लाइफस्टाइल तीनों जरूरी हैं।
सवाल- क्या कुछ लोगों के लिए ये कूलिंग फूड नुकसानदायक भी हो सकता है? किन लोगों को इसे सीमित मात्रा में लेना चाहिए?
जवाब- कुछ लोगों को इन्हें सीमित मात्रा में लेना चाहिए, वरना फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।
- जिनका पाचन कमजोर है।
- जिन्हें बार-बार सर्दी-जुकाम होता है।
- जिन्हें टूथ-सेंसिटिविटी है।
- जिन्हें साइनस की समस्या है।
- जिन्हें लो बीपी है।
- छोटे बच्चे और बुजुर्ग।
सवाल- वो कौन-सी चीजें हैं, जिसे लोग कूलिंग फूड समझकर खाते हैं, लेकिन असल में वो नुकसान पहुंचाती हैं?
जवाब- जो भी चीजें ठंडी लगती हैं, उसे हम ‘कूलिंग’ मान लेते हैं। लेकिन हर ठंडी चीज शरीर को अंदर से ठंडा नहीं करती। कुछ चीजें नुकसान भी पहुंचाती हैं। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- गर्मियों में कौन-सी चीजें नहीं खानी चाहिए या बहुत कम मात्रा में खानी चाहिए?
जवाब- गर्मियों में कुछ चीजें खाने से हेल्थ प्रॉब्लम्स बढ़ सकती हैं, इसलिए इन्हें खाने से बचना चाहिए। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- कूलिंग फूड्स लेने का सही समय और तरीका क्या है?
जवाब- सुबह से लेकर दोपहर का समय सभी फूड्स के लिए सबसे मुफीद समय है। इस दौरान शरीर का तापमान स्वाभाविक रूप से बढ़ता है और उसे ठंडक व हाइड्रेशन की जरूरत होती है। पॉइंटर्स से समझते हैं-
- सुबह खाली पेट या नाश्ते के साथ नारियल पानी, फल जैसे तरबूज-खरबूजा लेना फायदेमंद है।
- दोपहर में दही, छाछ, खीरा-ककड़ी जैसे फूड्स शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं।
- रात में दही या छाछ जैसे कूलिंग फूड्स लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन धीमा पड़ सकता है और सर्दी-खांसी हो सकती है।
कूलिंग फूड्स खाने का सही तरीका
- इन्हें हमेशा नेचुरल और संतुलित रूप में लें यानी फल और सब्जियां जूस की बजाय साबुत खाएं।
- साथ ही इन्हें फ्रिज से बहुत ठंडा निकालकर खाने की बजाय सामान्य तापमान पर लें ताकि पाचन प्रभावित न हो।
- एक बार में बहुत ज्यादा या कई कूलिंग चीजों को मिलाकर खाना भी ठीक नहीं होता है। इससे गैस या अपच हो सकती है।
कुल मिलाकर, शरीर को ठंडा रखने का मतलब सिर्फ ठंडी चीजें खाना नहीं है। सही खानपान, पर्याप्त पानी और संतुलित लाइफस्टाइल भी जरूरी है।
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