नीतीश की कहानी यहीं समाप्त नहीं होती है। उनका अगला लक्ष्य आईएएस बनना है। इसके लिए यूपीएससी का एग्जाम देते हैं। खबर के मुताबिक, उन्होंने प्रीलिम्स निकाल लिया है और मेंस की परीक्षा भी पास कर ली है। चलिए आज इनकी सक्सेस स्टोरी जानते हैं।
कौन है नीतीश पाठक
नीतीश पाठक नवादा के वारिसलीगंज प्रखंड के कुटरी गांव के रहने वाले हैं। उनका बचनप गांव में ही बीता और यहीं से पढ़ाई लिखाई भी की। उन्होंने कुटरी स्थित इंटर विद्यालय से मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई पूरी कीष इसके बाद वारिसलीगंज के एसएन सिन्हा कॉलेज से साल 2018 में पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन किया है।
परिवार में पढ़ाई का माहौल
उनके पिता का नाम अश्विनी पाठक है, जो पूजा-पाठ कराने के साथ निजी कोचिंग में पढ़ाते हैं। वहीं, मां बबिता देवी गृहिणी हैं। परिवार में पढ़ाई का माहौल ठीक था। उनके बड़े भाई प्रिंस पाठक दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय में एएसओ के पद पर कार्यरत हैं, जबकि दूसरे भाई रॉबिन्स पाठक आयकर विभाग में स्टेनोग्राफर हैं। दोनों भाइयों का चयन एसएससी के माध्यम से हुआ है। वहीं, नीतीश भी ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली चले गए। वहां उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी कराने वाले दृष्टि इंस्टीट्यूट से जुड़कर अपनी तैयारी को आगे बढ़ाया।
बीपीएससी का सफर
नीतीश पाठक ने जमकर मेहनत की और इसी का नतीजा था कि उन्होंने पहली ही दफा में BPSC क्रैक कर लिया। 68वीं BPSC में 36वीं रैंक के साथ उनका चयन आरडीओ के पद पर हुआ। नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने तैयारी जारी रखी और 69वीं BPSC में 13वीं रैंक हासिल कर ली। इस बार उनका चयन असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर हुआ। फिलहाल वे आरडीओ के पद पर नालंदा जिले के नूरसराय में कार्यरत हैं।
चौथे प्रयास में यूपीएससी की मेंस एग्जाम क्रैक
दो बार BPSC में सफलता मिलने के बाद अब नीतीश पाठक का अगला लक्ष्य यूपीएससी है। एनडीटीवी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने UPSC के चौथे प्रयास में मुख्य परीक्षा पास कर ली है। अब वो इंटरव्यू की तैयारी में लगे हैं। ऐसे में उनकी कहानी लाखों छात्रों को प्रेरित कर रही है।
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