पटना, दो अक्टूबर बिहार में आगामी विधान परिषद चुनाव में पांच सीट पर चुनाव लड़ने के कांग्रेस के फैसले के बाद विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन में दरार की अटकलों को पार्टी ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। इन पांच में से अधिकतर सीट पर कांग्रेस का मुकाबला उसकी सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवारों से होगा। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी (बीपीसीसी) के अध्यक्ष राजेश कुमार राम ने कहा कि पार्टी का फैसला कार्यकर्ताओं की भावनाओं और जनता की इस धारणा के अनुरूप है कि कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने प्रमुख चुनौती के रूप में उभर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम जिन सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं, वहां हमारा मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से होगा। बाकी सीट पर हम अपने इंडिया गठबंधन के सहयोगियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे।’’
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने विधान परिषद की कुल आठ सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए बृहस्पतिवार देर रात पांच उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी निर्वाचन क्षेत्रों में राजद भी मैदान में है।
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा इस बार भी चुनाव लड़ रहे हैं। बिहार विधान परिषद की आठ सीट के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है। चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त होने वाला है।
कांग्रेस महासचिव (संगठन) के. सी. वेणुगोपाल की ओर से बृहस्पतिवार देर शाम मंजूर की गई सूची के अनुसार, पार्टी ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से संजय यादव को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट से जद(यू) छोड़कर राजद में शामिल हुए संजीव कुमार ने राजद उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है। कांग्रेस ने कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से मनोज कुमार जायसवाल, दरभंगा स्नातक से रजनीकांत पाठक और पटना स्नातक से असदुल्लाह खान को उम्मीदवार बनाया है।
इन सभी सीटो पर राजद भी चुनाव लड़ रहा है। राजद ने पिछले महीने छह सीट के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की थी और कहा था कि ‘‘बाकी सीट पर फैसला लंबित है।’’
हालांकि, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य अखिलेश प्रसाद सिंह, ने इस घटनाक्रम को ज्यादा तवज्जो नहीं दी और कहा कि इसमें कुछ नया नहीं है। सिंह पहले राजद के नेता रह चुके हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को शायद याद नहीं होगा कि अतीत में भी गठबंधन सहयोगियों ने विधान परिषद की एक ही सीट पर अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इसमें कोई समस्या नहीं है, क्योंकि ये चुनाव संबंधित राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े जाते।’’
हालांकि, कांग्रेस के कुछ नेताओं ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर कहा कि पार्टी में दबदबा रखने वाले राजद को ‘‘सबक सिखाने’’ की जरूरत महसूस की जा रही थी। नेताओं ने आरोप लगाया कि राजद ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव जैसे महत्वपूर्ण चुनावों में भी ‘‘एकतरफा अपने उम्मीदवारों की घोषणा’’ करके सहयोगी दलों को असहज किया था।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए ऐसे मतदाता पात्र होते हैं, जिन्होंने भारत के किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम से कम तीन वर्ष पहले स्नातक की डिग्री हासिल की हो और संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में निवास करते हों। इसी तरह, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में माध्यमिक विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में कम से कम तीन वर्ष का शिक्षण अनुभव रखने वाले लोग मतदान कर सकते हैं। दोनों ही मामलों में मतदाता का संबंधित उद्देश्य के लिए तैयार मतदाता सूची में पंजीकृत होना अनिवार्य है।
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