पेरिस में चल रहे फ्रेंच ओपन टेनिस टूर्नामेंट में बुधवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी आर्यना सबालेंका को 25वीं वरीयता प्राप्त डायना श्नाइडर ने रोमांचक मुकाबले में हराकर प्रतियोगिता से बाहर कर दिया। 22 वर्षीय श्नाइडर ने शुरुआती सेट गंवाने और दूसरे सेट में डबल ब्रेक से पिछड़ने के बावजूद शानदार वापसी करते हुए मुकाबला 3-6, 7-5, 6-0 से अपने नाम कर लिया।
बता दें कि डायना श्नाइडर अपने करियर में पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फाइनल में पहुंची थीं। इतना ही नहीं, यह पहली बार था जब उनका सामना विश्व की नंबर एक खिलाड़ी से हुआ था। ऐसे दबाव भरे मुकाबले में उन्होंने जिस आत्मविश्वास और धैर्य का परिचय दिया, उसने टेनिस जगत को प्रभावित किया।
मुकाबले की शुरुआत में आर्यना सबालेंका पूरी तरह हावी नजर आईं। उन्होंने पहले सेट में अपने आक्रामक खेल के दम पर आसानी से बढ़त बना ली। दूसरे सेट में भी सबालेंका 4-1 से आगे थीं और जीत की ओर बढ़ती दिखाई दे रही थीं। लेकिन इसके बाद मैच का पूरा रुख बदल गया।
मौजूद जानकारी के अनुसार श्नाइडर ने 3-6, 1-4 से पिछड़ने के बाद अगले 13 में से 12 गेम अपने नाम कर लिए। उनकी बाएं हाथ की दमदार फोरहैंड शॉट्स ने सबालेंका को लगातार दबाव में रखा। दूसरी ओर दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी लगातार गलतियां करती चली गईं। पूरे मुकाबले में सबालेंका ने 57 अनावश्यक गलतियां कीं, जिनमें से 17 केवल निर्णायक सेट में आईं।
गौरतलब है कि तीसरे सेट में श्नाइडर का प्रदर्शन पूरी तरह एकतरफा रहा। उन्होंने लगातार छह गेम जीतकर सेट 6-0 से समाप्त किया। इससे पहले भी उन्होंने चौथे दौर में मैडिसन कीज़ के खिलाफ तीसरे सेट में 6-0 की जीत दर्ज की थी। लगातार दूसरे मुकाबले में निर्णायक सेट को बिना कोई गेम गंवाए जीतना उनके शानदार फॉर्म को दर्शाता हैं।
जीत के बाद श्नाइडर ने कहा कि मैच के दौरान तेज हवा और पहली बार इतने बड़े मंच पर खेलने के कारण वह काफी घबराई हुई थीं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनका ध्यान केवल परिस्थितियों और प्रतिद्वंद्वी के खेल को समझने पर था। उन्होंने हर अंक पर ध्यान केंद्रित रखा और स्कोर के बारे में ज्यादा नहीं सोचा। यही रणनीति अंत में उनके काम आई।
अब सेमीफाइनल में श्नाइडर का सामना माजा ख्वालिंस्का से होगा, जो स्वयं पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के अंतिम चार में पहुंची हैं। दोनों खिलाड़ियों के बीच इससे पहले वर्ष 2022 में क्ले कोर्ट पर एक मुकाबला हुआ था, जिसमें श्नाइडर ने जीत हासिल की थी। इस बार भी दोनों खिलाड़ी अपने पहले ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंचने के लिए संघर्ष करती नजर आएंगी।
बता दें कि इस वर्ष का फ्रेंच ओपन कई मायनों में ऐतिहासिक बन गया हैं। पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली सभी खिलाड़ी 21वीं सदी में जन्मी हैं। इनमें मीरा आंद्रेयेवा, डायना श्नाइडर, मार्टा कोस्त्युक और माजा ख्वालिंस्का शामिल हैं। वहीं वर्ष 2011 के बाद यह पहला अवसर है जब किसी ग्रैंड स्लैम के सभी सेमीफाइनलिस्ट 25 वर्ष से कम उम्र की खिलाड़ी हैं।
दूसरी ओर आर्यना सबालेंका के लिए यह हार काफी निराशाजनक रही हैं। वह लगातार सातवें ग्रैंड स्लैम सेमीफाइनल में पहुंचने की कोशिश कर रही थीं। हालांकि इस हार के बावजूद वह आधुनिक दौर की सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल हैं और उनके नाम 14 ग्रैंड स्लैम सेमीफाइनल खेलने का रिकॉर्ड दर्ज हैं।
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