यूजी प्रवेश प्रक्रिया में तीसरे चक्र का सीट आवंटन राउंड शुक्रवार की देररात पूरा हुआ। अब तक कुल 9400 सीटों में 7500 से ज्यादा भर ली गई हैं। अनुमान है कि यूजी प्रवेश में बीएचयू की 95 फीसदी या इससे भी ज्यादा सीटें भर ली जाएंगी।
पीजी में 2000 सीटें रह गई खाली
लगभग डेढ़ महीने चली पीजी प्रवेश प्रक्रिया में अंतिम समय में भी दो हजार से ज्यादा सीटें खाली रह गईं। खासतौर पर संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश निराशाजनक रहा। बीएचयू मुख्य परिसर की कुल 82 फीसदी सीटें तो संबद्ध कॉलेजों की मात्र 54 फीसदी सीटें ही भर सकीं।
इस बीच शुरू हुए यूजी सीट आवंटन राउंड के लिए छात्रों का काफी रुझान देखने को मिल रहा है। बीएचयू के यूजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीयूईटी परीक्षा पास करने वाले 93 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया था। सीट आवंटन राउंड में सीट लॉक और फ्रीज करने की रफ्तार भी काफी तेज रही। तीसरे राउंड तक 7500 से ज्यादा सीटें भर ली गई हैं। अब लगभग दो हजार सीटें ही खाली बची हैं।
यूजी प्रवेश में चौथा और अंतिम सीट आवंटन राउंड 17 अगस्त को शुरू किया जाएगा। इसके बाद दो स्पॉट राउंड चलाने की तैयारी है। आवश्यकता पड़ने पर मॉपअप राउंड भी चलाया जा सकता है। हालांकि बीएचयू के अधिकारी मौजूदा रफ्तार से अंदाजा लगा रहे हैं कि इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। केंद्रीय प्रवेश समिति के अध्यक्ष प्रो. भास्कर भट्टाचार्य ने कहा कि अबकी सीट लॉक करने के बाद छोड़ने वालों की संख्या कम करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यूजी प्रवेश इस साल हर बार से ज्यादा बेहतर होंगे।
स्नातकोत्तर कोर्सों में 145 विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में शुक्रवार को स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में 145 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। प्रवेश सेल के उपसमन्वयक प्रो. नलिनी श्याम कामिल ने बताया कि एमए अर्थशास्त्र, एमए मनोविज्ञान, एमए अंग्रेजी और एमए हिन्दी के पाठ्यक्रमों की काउंसिलिंग 18 अगस्त को होगी।
कवि दिनेश कुशवाह का बीएचयू में सम्मान
बीएचयू के हिन्दी विभाग में शुक्रवार को कवि दिनेश कुशवाह का सम्मान और एकल काव्य-पाठ हुआ। विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे दिनेश कुशवाह अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा में हिंदी विभाग के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके दो कविता संग्रह ‘इसी काया में मोक्ष’ और ‘इतिहास में अभागे’ हिंदी समाज में बहुचर्चित रहे हैं। कार्यक्रम में स्वागत वक्तव्य देते हुए प्रो. मनोज कुमार सिंह ने कहा कि दिनेश कुशवाह ने बीएचयू से ही राहुल सांकृत्यायन पर शोध किया। इस कारण उनकी कविताओं में बौद्ध दर्शन और मार्क्सवादी चिंतन का प्रभाव है। कवि दिनेश कुशवाह ने एक लड़ाई, अनवरत, मंदिर, सोच लीजिए, आत्मपरिचय, एकलव्य की तरफ से, हमारा खून क्यों लाल, बनारस आदि कविताओं का पाठ किया।
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