कंपनी के शेयर में सिर्फ छोटे निवेशकों की ही दिलचस्पी नहीं दिखाई दी, बल्कि कुछ बड़े निवेशकों और फंड हाउसों ने भी ब्लॉक डील के जरिए खरीदारी की। रिपोर्ट के मुताबिक, 360 One म्यूचुअल फंड ने करीब 3 लाख शेयर ₹14.36 करोड़ में खरीदे। इसके अलावा KIFS इंटरप्राइसेज ने करीब 2.61 लाख शेयरों के लिए ₹13.62 करोड़ खर्च किए, जबकि संजय पोपटला जैन ने करीब 3 लाख शेयर ₹14.36 करोड़ में खरीदे। बड़े निवेशकों की इस खरीदारी ने भी बाजार में कंपनी के शेयर को लेकर दिलचस्पी बढ़ाई।
बिहारी लाल इंजीनियरिंग (Behari Lal Engineering) का IPO निवेशकों के बीच जबरदस्त लोकप्रिय रहा था। करीब ₹302 करोड़ के इस IPO को 108.44 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। कंपनी ने IPO के लिए ₹271 से ₹285 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। इतनी मजबूत मांग के बाद शेयर की लिस्टिंग से ही निवेशकों को बड़ा फायदा मिला।
बिहारी लाल इंजीनियरिंग (Behari Lal Engineering) एक इंटीग्रेटेड आयरन और स्टील मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है। कंपनी के पंजाब के मंडी गोबिंदगढ़ में दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं और फतेहगढ़ साहिब जिले में तीसरी यूनिट का निर्माण शुरू किया गया है। कंपनी मेटल रोल्स, इंजीनियरिंग कास्टिंग्स, अलॉय स्टील प्रोडक्ट्स और फोर्जिंग इंगॉट्स जैसे उत्पाद बनाती है। इनका इस्तेमाल स्टील, पावर और हेवी इंजीनियरिंग जैसे उद्योगों में होता है।
इस तरह IPO के ₹285 के इश्यू प्राइस से ₹548 के इंट्राडे हाई तक शेयर ने बेहद कम समय में मजबूत तेजी दिखाई है। हालांकि, लिस्टिंग के बाद इतनी तेज बढ़त वाले शेयर में मुनाफावसूली और उतार-चढ़ाव का जोखिम भी रहता है। इसलिए निवेशकों को सिर्फ शुरुआती रिटर्न देखकर फैसला लेने के बजाय कंपनी के कारोबार, वित्तीय प्रदर्शन और वैल्यूएशन को भी समझना चाहिए।
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