संयुक्त राष्ट्र महासभा में बांग्लादेश ने एक ऐसा बयान दिया है जिसे सुनकर भारत के होश उड़ जाएंगे। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बकायदा यूएन में खड़े होकर कहा है कि हम म्यांमार के मुस्लिमों से परेशान है। हमें म्यांमार के मुस्लिमों से बचा लो। तारिक रहमान ने कहा है कि म्यांमार के रोहिंग्या मुस्लिम हमारे संसाधनों पर बोझ बन गए हैं। आपको बता दें कि बांग्लादेश काफी समय से रोहिंग्या मुसलमानों को अपने देश से निकालकर वापस म्यांमार भेजना चाहता है। सालों से बांग्लादेश में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश की सरकार अपना नागरिक नहीं मानती बल्कि इन्हें जबरन म्यांमार भेजना चाहती है। आपको बता दें कि बांग्लादेश के कॉक्स बाजार और आसपास के इलाकों में लगभग 12 से 13 लाख रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर बन चुका है।
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बांग्लादेश का कहना है कि रोहिंग्या मुस्लिमों की वजह से हमारे देश की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। हमें आर्थिक और सामाजिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। लेकिन हैरानी की बात देखिए कि जब भारत अवैध बांग्लादेशियों को अपने देश से निकालना चाहता है तो बांग्लादेश की सरकार अपने ही लोगों को लेने से मना कर रही है। बांग्लादेश के नेता तो यहां तक बोलते हैं कि जो बांग्लादेशी भारत चले गए, अब वो वहीं के नागरिक बन गए। यानी सालों से बांग्लादेश में रहने वाले रोहिंग्या तो बांग्लादेशी नहीं बने लेकिन अवैध तरीके से भारत में घुसने वाले बांग्लादेशी भारतीय बन गए हैं। इससे बड़ी मक्कारी वाली बात क्या होगी? एक अनुमान के मुताबिक भारत में डेढ़ से 2 करोड़ के करीब अवैध बांग्लादेशी घुस चुके हैं। हालांकि यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है। इसके अलावा लाखों बांग्लादेशी अब भारत के नागरिक भी बन चुके हैं। और भी खतरे की बात यह है कि अवैध बांग्लादेशियों के साथ-साथ रोहिंग्या मुस्लिम भी भारत में घुसपैठ करते हैं। मगर जब भारत कानूनी तरीके से इन्हें निकालने की बात करता है तो भारत के राजनीतिक दल मुस्लिम संगठन फर्जी बुद्धिजीवी और YouTube पत्रकार भारत को ही गालियां देते हैं। वैसे गाली तो देंगे ही क्योंकि यह उनका वोट बैंक जो है। रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश के लिए उतना बड़ा खतरा नहीं है जितना अवैध बांग्लादेशी भारत के लिए हैं। अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए भारत पर सामाजिक और आर्थिक बोझ है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।
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आपको बता दें कि अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी भारत के संसाधनों, सब्सिडी और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं, जिससे भारत के स्थानीय नागरिकों के अधिकार प्रभावित होते हैं। कई बांग्लादेशी घुसपैठियों ने बिचौलियों की मदद से अवैध तरीके से आधार कार्ड और वोटर आईडी बनवा लिए हैं। इन्होंने कई राज्यों में डेमोग्राफी बदल दी है। आज यह सरकारें गिराने के लिए काम आ रहे हैं। सीमावर्ती राज्यों और बड़े शहरों में अपराध, अवैध तस्करी और स्थानीय स्तर पर तनाव जैसी समस्या के लिए बांग्लादेशी घुसपैठिए एक बड़ी वजह बन गए हैं। भारत को अब संयुक्त राष्ट्र में बोलना चाहिए कि बांग्लादेश अपने लोगों को यहां से वापस लेकर जाए।
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