बलिया के डीएम IAS मंगला प्रसाद सिंह ने दिव्यांग छात्रा रागिनी को ट्राइसाइकिल भेंट कर एक मिसाल पेश की है। अब रागिनी बिना किसी बाधा के स्कूल जाकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेगी।
हादसे में खो दिए थे पैर, फिर भी नहीं डगमगाया हौसला
बलिया जिले के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली छात्रा रागिनी कुछ समय पहले एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना का शिकार हो गई थी। इस हादसे में उसने अपने पैर गंवा दिए, जिससे उसका चलना-फिरना पूरी तरह बंद हो गया। किसी भी बच्चे के लिए जीवन का ऐसा मोड़ मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ देने वाला होता है।
लेकिन रागिनी ने इस कठिन परिस्थिति के सामने हार नहीं मानी। पैरों से लाचार होने के बावजूद उसके अंदर पढ़ाई जारी रखने का जुनून और कुछ बनने का सपना रत्ती भर भी कम नहीं हुआ। हालांकि, रोजाना स्कूल जाने और घर वापस आने के लिए उसे काफी संघर्ष करना पड़ता था और वह दूसरों की मदद पर निर्भर रहने को मजबूर थी।
जनसुनवाई में डीएम तक पहुंची रागिनी की गुहार
जब यह मामला बलिया के जिलाधिकारी आईएएस मंगला प्रसाद सिंह के सामने आया, तो उन्होंने बिना किसी देरी के तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने रागिनी को अपने कार्यालय में बुलाया, उससे बहुत ही आत्मीयता से बातचीत की और उसकी समस्याओं को ध्यान से सुना।
छात्रा के पढ़ाई के प्रति समर्पण और अदम्य साहस को देखकर डीएम काफी प्रभावित हुए। उन्होंने तुरंत अधिकारियों को निर्देश देकर रागिनी के लिए एक नई ट्राइसाइकिल की व्यवस्था कराई और अपने हाथों से उसे चाबी और वाहन सौंपा।
अब बिना किसी रुकावट के पूरी होगी पढ़ाई
ट्राइसाइकिल मिलने से रागिनी के चेहरे पर खुशी और उम्मीद की एक नई चमक देखने को मिली। अब उसे स्कूल जाने या रोजाना के कामों के लिए किसी अन्य व्यक्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वह अब आत्मनिर्भर होकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगी।
आईएएस मंगला प्रसाद सिंह 2012 बैच के अधिकारी
मंगला प्रसाद सिंह वर्ष 2012 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी हैं, जिनका जन्म 24 नवंबर 1971 को हुआ था। वह राज्य सिविल सेवा (PCS) से प्रमोट होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बने हैं। वर्तमान में बलिया के जिलाधिकारी (DM) के रूप में तैनात होने से पहले वह हरदोई और गाजीपुर जिलों में भी डीएम रह चुके हैं।
यह घटना न केवल रागिनी के जीवन में एक नया सवेरा लेकर आई है, बल्कि देश के अन्य छात्रों के लिए भी यह एक बड़ा संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, हिम्मत और जज्बे के बल पर हर रुकावट को पार किया जा सकता है।
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