ऐसे कई स्टूडेंट्स हैं, जो ब्रिटेन में हायर एजुकेशन हासिल करना चाहते हैं। वहीं एडमिशन के दौरान कई तरह के डॉक्यूमेंट्स भी जमा करने होते हैं। ऐसा ही एक जरूरी डॉक्यूमेंट स्टेटमेंट ऑफ पर्पज है। इसके आधार पर एडमिशन कमेटी तय करती है कि छात्रों को एडमिशन देना है या नहीं। जिस तरह मार्कशीट की अहमियत होती है, वैसे ही SOP की भी एडमिशन के समय जरूरत होती है।
बता दें कि ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज अच्छे SOP पर ज्यादा जोर देती हैं। SOP एक तरह का पर्सनल लेटर या निबंध है। किसी यूनिवर्सिटी या कॉलेज में एडमिशन पाने के लिए इसे कोई स्टूडेंट लिखता है। जब कोई यूनिवर्सिटी आपको सेलेक्ट करती है, तो वह ये जानना चाहती है कि आप कौन हैं और आप उनकी यूनिवर्सिटी में क्यों पढ़ना चाहते हैं। SOP में इन सभी सवालों के जवाब दिए जाते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज के लिए एक अच्छा SOP लिखने का तरीका क्या है।
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जानें SOP का फायदा
आप अपना पर्सनल स्टेटमेंट यानी की SOP को यूनिवर्सिटी को दिखा सकते हैं। इससे आप यह साबित कर सकेंगे कि आप अपने ग्रेड्स से कहीं बढ़कर हैं। यह आपको उस सब्जेक्ट में अपना इंट्रेस्ट दिखाने और यह बताने का मौका देता है कि आप इस कोर्स के लिए सही क्यों हैं।
जिन कोर्सेज में एडमिशन के लिए ज्यादा कॉम्पिटिशन होता है। इसमें SOP की भूमिका बढ़ जाती है। क्योंकि एक तरह की प्रोफाइल वाले ढेर सारे छात्रों के बीच सही कैंडिडेट्स ‘पर्सनल स्टेटमेंट’ के आधार पर चुना जाता है। SOP के माध्यम से छात्रों को कोर्स के प्रति असली जिज्ञासा, उत्साह और प्रतिबद्धता दिखाने का मौका मिलता है।
चुराकर न लिखें SOP
एक्सपर्ट के मुताबिक SOP हमेशा खुद की होनी चाहिए। इसमें छात्रों का एक्सपीरियंस, इंट्रेस्ट और आकांक्षाओं की जानकारी होनी चाहिए। वहीं छात्रों को कभी भी सैंपल स्टेटमेंट, वेबसाइटों और अन्य लोगों के कंटेंट को कॉपी करने से बचना चाहिए।
ब्रिटेन में साहित्य की चोरी पकड़ने वाले सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है। अगर इसमें कोई समानता पाई जाती है, तो यह यूनिवर्सिटी को सूचित किया जाता है। इसका छात्र के आवेदन पर गंभीर परिणाम हो सकता है। इसलिए हमेशा अपना SOP जमा करना चाहिए।
कैसे करें SOP लिखने की तैयारी
अच्छा SOP लिखने में समय लगता है। जिस कारण इसको लिखने के लिए जल्दी शुरूआत करना सही रहता है। SOP लिखने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।
आपने जिस कोर्स को चुना है, उस पर रिसर्च करें और यह समझने के लिए यूनिवर्सिटी की वेबसाइट्स पर विजिट करें। इस दौरान यह देखें कि वह किन स्किल्स, क्वालिटी और रुचियों में अहमियत देते हैं।
सही वर्क एक्सपीरियंस, रुचियों और उपलब्धियों की एक माइंड मैप या लिस्ट बनाएं। जो कोर्स के लिए आपको एक अच्छे और बेहतरीन कैंडिडेट के रूप में दिखाएं।
वहीं कई ड्राफ्ट्स लिखें और समय के साथ अपने विचारों को अधिक बेहतर बनाएं।
सलाहकारों, टीचर्स, परिवार के सदस्यों या भरोसेमंद दोस्तों से फीडबैक लें।
UCAS की मुख्य हेडलाइन और अपने स्कूल या यूनिवर्सिटी द्वारा निर्धारित किसी भी एक्स्ट्रा समय-सीमा की जानकारी रखें।
SOP में क्या शामिल करें
आपको किस चीज ने उस फील्ड में इंट्रेस्ट लेने के लिए प्रेरित किया।
आप किसी खास कोर्स की पढ़ाई क्यों करना चाहते हैं।
आपने क्लास के बाहर इस सब्जेक्ट को कैसे ढूंढा।
आपने किस क्वालिटी और स्किल को विकसित किया है, जोकि यूनिवर्सिटी में आपको सफल बनाएगी।
‘सुपर-करिकुलर’ गतिविधियों को करें हाइलाइट
‘सुपर-करिकुलर’ एक्टिविटी का अक्सर SOP का सबसे मजबूत हिस्सा होता है। क्योंकि यह आपके द्वारा चुने गए सब्जेक्ट के साथ जुड़ाव को दिखाती हैं। जैसे-
सब्जेक्ट से संबंधित प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना।
ऑनलाइन कोर्स पूरा करना।
यूनिवर्सिटी के ‘टेस्टर सेशन’ या समर स्कूल में हिस्सा लेना
सब्जेक्ट से संबंधित जर्नल, किताबें, ब्लॉग या लेख आदि पढ़ना।
वर्क एक्सपीरियंस या रिसर्च प्रोजेक्ट्स आदि करना।
इन गतिविधियों को लिस्ट करने की जगह यह बताएं कि आपने क्या सीखा और कैसे इस विषय ने आपकी समझ को मजबूत किया है। उन स्किल्स के बारे में सोचें, जिनको आपके अपने अनुभवों और पढ़ाई के दौरान विकसित किया। यह एक्टिविटीज यूनिवर्सिटी को यह समझने में सहायता करती हैं कि आप कौन हैं। इसमें खेल, संगीत, वॉलिंटियर, ट्यूशन, ब्लॉगिंग, पार्ट टाइम काम, कोई नई भाषा या अन्य व्यक्तिगत रुचियां आदि शामिल हैं।
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