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राजनीतिक गलियारों में हेमंत सोरेन और गौरव गोगोई की मीटिंग को बीजेपी के खिलाफ एक बड़े मास्टरप्लान के तौर पर देखा जा रहा है. सीएम सोरेन की सीधी नजर असम के उन लाखों आदिवासी वोटर्स पर है, जो पीढ़ियों से वहां के चाय बागानों में काम कर रहे हैं. माना जा रहा है कि कांग्रेस और जेएमएम मिलकर असम में सीट बंटवारे और चुनावी गठबंधन की बहुत बड़ी रणनीति तैयार कर रहे हैं.
गौरव गोगोई के साथ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन. (फाइल फोटो)
रांची. असम में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष हेमंत सोरेन की सक्रियता ने पूर्वोत्तर की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. इसी क्रम में गुरुवार को रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास में असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने उनसे मुलाकात की. इस बैठक को असम चुनाव के संदर्भ में विपक्षी दलों के संभावित तालमेल और रणनीतिक समन्वय की दिशा में अहम माना जा रहा है.
बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह तथा झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के. राजू भी मौजूद थे. आधिकारिक तौर पर इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे असम चुनाव को लेकर विपक्षी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सूत्रों के अनुसार बैठक में आगामी असम विधानसभा चुनाव, झारखंड में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई. इसके साथ ही असम में झामुमो और कांग्रेस के बीच संभावित सीट बंटवारे और चुनावी तालमेल को लेकर भी प्रारंभिक बातचीत की चर्चा है.
दरअसल, पिछले लगभग डेढ़ महीने के भीतर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम में दो बड़ी जनसभाओं को संबोधित किया है. फरवरी में तिनसुकिया जिले में आयोजित आदिवासी महासभा की रैली और इसके बाद विश्वनाथ जिले में हुई सभा में उमड़ी भीड़ ने वहां की राजनीति में एक नए समीकरण की संभावनाओं को बल दिया है.
इन सभाओं में उन्होंने खास तौर पर चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासी समुदाय की पहचान, सम्मान और अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. झामुमो का मानना है कि असम में झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से जाकर बसे लाखों आदिवासी समुदाय राजनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण शक्ति हैं, जिनकी आवाज अभी तक मुख्यधारा की राजनीति में अपेक्षित रूप से नहीं उठाई गई है. इसी सामाजिक आधार पर पार्टी वहां अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है.
झामुमो के महासचिव और राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार का कहना है कि पार्टी का लक्ष्य देश के लगभग 12 करोड़ आदिवासियों की मजबूत आवाज बनना है. उनके अनुसार असम में मिल रहे जनसमर्थन से यह संकेत मिलता है कि वहां के आदिवासी समाज में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई उम्मीदें पैदा हो रही हैं. इस बीच रांची पहुंचने पर मीडिया से बातचीत में गौरव गोगोई ने बताया कि कांग्रेस नेतृत्व ने असम विधानसभा चुनाव के लिए झारखंड कांग्रेस नेता बंधु तिर्की को वरीय पर्यवेक्षक बनाया है.
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर भाजपा को चुनौती देने की रणनीति तैयार की जा रही है और इसी सिलसिले में झारखंड के नेताओं के साथ भी विचार-विमर्श किया जा रहा है. बहरहाल, रांची में कांग्रेस नेताओं और हेमंत सोरेन की यह मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार से आगे बढ़कर असम चुनाव की संभावित रणनीति के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखी जा रही है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
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