अपने दावों को मजबूत करने के लिए अमेरिकी सांसद ने अपने हालिया चीन दौरे का भी हवाला दिया। उन्होंने समिट में बताया कि चीन यात्रा के दौरान वहाँ तैनात भारतीय राजदूत ने खुद उनसे साझा किया था कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और फैसलों के कारण दोनों देशों के बीच सालों से बना ‘एक पूरी पीढ़ी का भरोसा’ खत्म हो गया है। डेमोक्रेटिक सांसद का यह तीखा बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मंच पर भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी को बेहद अहम माना जाता है, लेकिन उनके इस दावे ने अमेरिकी राजनीतिक और कूटनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। खन्ना ने आगे कहा कि मैं चीन में था और वहाँ के भारतीय राजदूत ने मुझे बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप की वजह से भरोसे की एक पूरी पीढ़ी का भरोसा टूट गया है। अगर हम इस बात को सच-सच नहीं कहते कि इस राष्ट्रपति ने कितना नुकसान पहुँचाया है… तो हम असलियत से दूर जी रहे हैं। पिछले साल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने से भारत और अमेरिका के रिश्तों पर असर पड़ा है। उन्होंने अमेरिका आने वाले भारतीय सामान पर ये शुल्क लगाने की मुख्य वजह नई दिल्ली द्वारा रूस से तेल की खरीद को बताया था।
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एक ऐसा अमेरिका जो अपनी नैतिक सोच भूल चुका है
उन्होंने ईरान और क्यूबा को धमकाने और ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दौर में अमेरिका की विदेश नीति जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली हो गई है। खन्ना ने कहा कि अब हमारे सामने एक ऐसा अमेरिका है जो अपनी नैतिक सोच भूल चुका है, जिसकी विदेश नीति ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाली है – जो ईरान और क्यूबा को धमका रहा है, ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की धमकी दे रहा है – और हम ऐसे डिनर कर रहे थे मानो सब कुछ सामान्य हो। जब यह राष्ट्रपति सचमुच पूरी दुनिया में अमेरिका की लीडरशिप को खत्म कर रहा है, तो भला कौन इस या उस तरह की पार्टनरशिप की परवाह करता है? खन्ना ने आगे कहा कि इमिग्रेंट्स (प्रवासियों) को लेकर भड़काऊ बातें करना, इस राष्ट्रपति का भड़काऊ रवैया और अमेरिका आने वाले इमिग्रेंट्स की कमी की बात करना हम चुप कैसे बैठ सकते हैं और उनकी उन नीतियों की निंदा कैसे न करें जो उन्होंने स्टूडेंट वीज़ा को लेकर अपनाई हैं, या अमेरिका आने वाले टैलेंट को जिस तरह से गलत दिखाया गया है?
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डेमोक्रेटिक नेता ने कहा कि ट्रंप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अमेरिका के आगे रहने की बात तो करते हैं, लेकिन टॉप AI रिसर्चर्स में से 38 प्रतिशत चीनी मूल के हैं। खन्ना ने कहा, “टॉप AI रिसर्चर्स में से 38 प्रतिशत चीनी मूल के हैं। 72 प्रतिशत के पास विदेशी डिग्रियां हैं। यह ऐसे राष्ट्रपति हैं जो यह नहीं समझते कि हमें टैलेंट को भर्ती करने की ज़रूरत है, न कि उन्हें दूर भगाने की।
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