बता दें कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों का व्यापक सूचकांक इस महीने दो अंकों की गिरावट की ओर बढ़ रहा है, जो 2022 के बाद सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है। जापान का प्रमुख सूचकांक भी इस दौरान गिरावट में रहा, वहीं दक्षिण कोरिया के बाजार में भी तेज कमजोरी देखने को मिली। गौरतलब है कि इस तरह की गिरावट ने वैश्विक निवेशकों के भरोसे को झटका दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआत में बाजार सिर्फ खबरों के आधार पर प्रतिक्रिया दे रहा था, लेकिन अब निवेशकों के बीच डर का माहौल बन गया है और वे जोखिम से दूरी बना रहे हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और लगातार हो रहे हमलों ने बाजारों को अस्थिर बना दिया है।
हालांकि कुछ समय के लिए माहौल में थोड़ा सुधार तब देखने को मिला जब संकेत मिले कि अमेरिका सैन्य अभियान को सीमित करने पर विचार कर सकता है। इसके बाद अमेरिकी वायदा बाजारों में हल्की मजबूती दर्ज की गई।
इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जो निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण बनी हुई हैं। बता दें कि तेल की कीमतों में तेज उछाल ने महंगाई के खतरे को और बढ़ा दिया है, खासकर उन देशों के लिए जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।
गौरतलब है कि बढ़ती महंगाई के साथ-साथ अब आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका भी सामने आने लगी है। इसी वजह से बांड बाजारों पर भी दबाव देखने को मिल रहा है, क्योंकि ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर हो गई हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार अनिश्चित माहौल में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। अमेरिकी मुद्रा में मजबूती आई है, जबकि सोने की कीमतों में भी बढ़त दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि बाजार अभी भी जोखिम से बचने की रणनीति पर चल रहा है।
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