सिंगर आशा भोसले अपने निधन से एक दिन पहले मुंबई में तीन घंटे का मराठी नाटक देखने गई थीं। वहां वह स्टेज पर भी गईं और नाटक देखने आए लोगों को डांट लगाते हुए कला को जिंदा रखने की बात कही थी। यह बात आशा भोसले के पोते चिंटू भोसले ने स्क्रीन को दिए इंटरव्यू में बताई। आशा भोसले का 12 अप्रैल को 92 साल की उम्र में निधन हुआ था। उनके परिवार में बेटे आनंद भोसले और पोते-पोती जनाई भोसले और चिंटू भोसले हैं। चिंटू ने आशा भोसले के आखिरी पलों को याद करते हुए बताया कि मौत से 3-4 दिन पहले उनकी आखिरी बातचीत हुई थी। उस शाम उन्होंने ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध पर बात की थी और साथ में आम खाए थे। उन्होंने आगे कहा, ‘वह बहुत शांति से गईं। नींद में ही उनका निधन हुआ। उन्हें कोई दर्द नहीं था। हमने कहा था कि हम अस्पताल आएंगे, लेकिन उन्होंने कहा था, ‘मुझे थोड़ी देर सोने दो।’ उन्होंने अपनी शर्तों पर वैसे ही दुनिया छोड़ी, जैसे उन्होंने पूरी जिंदगी जी।’ परिवार दुख से उबरने की कोशिश कर रहा परिवार के बारे में बात करते हुए चिंटू ने कहा कि सभी इस दुख से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जनाई इस खबर से पूरी तरह टूट गई हैं, क्योंकि वह आशा भोसले के बहुत करीब थीं। दोनों ने साथ में कई शो किए थे। चिंटू ने कहा कि परिवार दुख में भी आशा भोसले की जिंदगी को सेलिब्रेट कर रहा है। सभी लोग साथ बैठते हैं, डिनर करते हैं, बातें करते हैं और हंसते हैं। उन्होंने कहा कि यही तरीका है, जिससे वे इस दुख को संभाल रहे हैं।
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