तारिक रहमान ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। उनके साथ 13 और कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली है। कैबिनेट में दो हिंदू नेताओं को भी शामिल किया गया है। भारत की ओर से शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विदेश सचिव विक्रम मिश्री पहुंचे। वहीं बांग्लादेश के पीएम की शपथ लेते ही तारिक रहमान एक्शन में दिखाई दे रहे हैं। तारिक रहमान ने चुनाव से पहले जो वादे किए थे उन पर उन्होंने काम करना भी शुरू कर दिया है। तारिक रहमान का कोई वादा सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा तो वो था बांग्लादेश की कानून व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना और हिंदुओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए सख्त कानूनी सुरक्षा तंत्र लागू करना।
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शपथ लेते ही तारिक रहमान ने हिंदुओं पर हो रहे हमलों पर बड़ा एक्शन लिया है। जो भी इन हमले के जिम्मेदार रहे हैं उन पर सबसे तगड़ा एक्शन तेज कर दिया है। दरअसल तारिक रहमान ने हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने और चुनाव के दौरान मारपीट करने वाले नेताओं के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। बांग्लादेश के सिराजगंज में अल्पसंख्यकों की दुकानों में तोड़फोड़ और जबरदस्ती वसूली के आरोप में बीएनपी ने तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस दिया है। वोटरों को डराने, धमकाने समेत कई आरोपों में दो और नेताओं को सस्पेंड किया गया है। चुनाव जीतने के बाद से तारिक रहमान की पार्टी ने पार्टी अनुशासन को लेकर कड़ा कदम उठाया है। तारिक रहमान चुनाव प्रचार के बाद से ही बांग्लादेश में नॉर्मल हालात बहाल करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कानून व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया है। उनकी पार्टी में अनुशासन को भी उतनी ही अहमियत दी जा रही है। हमलों के आरोप में बीएनपी के तीन नेताओं को कारण बतौर नोटिस दिया गया है। इनमें फिरोज अहमद और आरजू अहमद शामिल हैं।
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शपथ से कुछ घंटे पहले भी तारिक रहमान ने बड़ा बयान देते हुए कहा था कि हमें सुरक्षित और मानवीय बांग्लादेश बनाने के लिए सभी का सहयोग चाहिए। किसी भी बहाने से किसी के साथ अन्याय नहीं किया जा सकता। कानून व्यवस्था हर हाल में बनाए रखनी होगी। तारिक रहमान ने दंगाइयों को चेतावनी दी कि किसी भी कीमत पर हिंसा प्रतिशोध या उकसावे की कारवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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