क्या है पूरा मामला?
अनाया ने अपनी सर्जरी के बाद कानूनी कागजात पर अपनी सही पहचान पाने के लिए ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत आवेदन किया था। इस सरकारी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उन्हें एक मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए कहा गया।
अनाया ने वीडियो में उस असहज कर देने वाले पल को याद करते हुए बताया – “हाल ही में ट्रांसजेंडर बिल एक्ट के तहत प्रक्रिया पूरी करने के लिए मुझे एक सरकारी अस्पताल में मेडिकल बोर्ड के सामने जाना पड़ा। वहां मुझसे अपने कपड़े उतारने के लिए कहा गया, ताकि डॉक्टर मेरे पूरे शरीर की जांच कर सकें। उस कमरे में कई डॉक्टर मौजूद थे, जिनमें पुरुष डॉक्टर भी शामिल थे। “
‘आखिर पहचान के लिए शरीर का सबूत क्यों?’
अनाया ने आगे बताया कि इस दौरान उनकी गायनेकोलॉजिकल जांच भी की गई। यह पूरा अनुभव उनके लिए बहुत ज्यादा असहज और उनकी निजी जिंदगी में दखल देने जैसा था।
उन्होंने अपने दिल का दर्द बयां करते हुए कहा, “उस वक्त मैं यही सोच रही थी कि आखिर मुझे अपनी पहचान साबित करने के लिए अपने शरीर का सबूत क्यों देना पड़ रहा है? सिर्फ इसलिए कि कागजों पर मुझे वही पहचान मिल सके, जो मैं वास्तव में हूं। उस समय मैं खुद को बेहद असुरक्षित और बेबस महसूस कर रही थी।”
प्रक्रिया मर्जी से थी, पर गरिमा का क्या?
अनाया ने यह भी साफ किया कि उन्होंने यह जांच अपनी मर्जी से करवाई थी, क्योंकि इसके बिना उन्हें वो कानूनी पहचान नहीं मिलती जिसके लिए उन्होंने इतना लंबा संघर्ष किया है और इतना दर्द झेला है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या किसी इंसान को उसकी पहचान देने के लिए उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाना जरूरी है?
अनाया का कहना है कि वे इस बात को इसलिए सबके सामने ला रही हैं ताकि लोग समझ सकें कि एक ट्रांस पर्सन के लिए इस प्रक्रिया से गुजरना कितना मानसिक और शारीरिक कष्ट देता है। उनका मानना है कि किसी भी व्यक्ति को कानूनी पहचान देते समय उसके सम्मान और गरिमा का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर मिला भारी समर्थन
अनाया के इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई ट्रांसवुमन और आम लोग उनके समर्थन में उतर आए हैं। लोगों का कहना है कि अपनी पहचान साबित करने के लिए किसी को इस तरह की असहज स्थिति से गुजारना बेहद दुखद है और इस पूरी व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत है।
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