भारत के प्राथमिक बाजार में अभूतपूर्व उछाल देखा जा रहा है और मुख्य मंच पर प्रस्तावित आईपीओ 3.86 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। उद्योग निकाय एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (एआईबीआई) ने बताया कि यह आंकड़ा 2026 में अब तक 84 निर्गमों के जरिये जुटाई गई 1.10 लाख करोड़ रुपये की राशि से लगभग 3.5 गुना अधिक है। इससे सार्वजनिक बाजार से पूंजी जुटाने को लेकर कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी का पता चलता है।
एआईबीआई ने अपने मध्यावधि श्वेत पत्र में बताया कि प्रस्तावित आईपीओ में करीब 130 ऐसी कंपनियां शामिल हैं, जिन्हें पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से मंजूरी मिल चुकी है। वहीं, अन्य 75 कंपनियों ने मसौदा दस्तावेज दाखिल किए हैं और वे नियामकीय मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। एआईबीआई के चेयरमैन महावीर लूणावत ने कहा कि कुल प्रस्तावित निर्गमों में सेबी की मंजूरी हासिल कर चुकी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये है, जबकि विनियामक समीक्षा के तहत लंबित कंपनियां 1.44 लाख करोड़ रुपये जुटाना चाहती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि प्राथमिक बाजार अब कभी-कभार आने वाले चक्रीय दौर से आगे बढ़कर पूंजी निर्माण के एक मजबूत और अधिक स्थायी तंत्र में बदल रहा है। इसके अनुसार मुख्य मंच (बीएसई-एनएसई) पर सूचीबद्ध होने वाले आईपीओ के जरिये वर्ष 2016 से लेकर 2026 में अब तक कुल मिलाकर 8.36 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। इस दौरान सालाना जुटाई जाने वाली राशि 2016 के 26,494 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 1.76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
इस दौरान निर्गमों की संख्या 2016 के 26 से बढ़कर 2025 में 103 हो गई। वर्ष 2026 में अब तक मुख्य मंच पर सूचीबद्ध होने वाले 84 आईपीओ ने 1.10 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं।
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