दक्षिण कोरिया की 78 वर्षीय बैंग चुन-जा के घर अब दरवाजा खुलते ही कोई उनका इंतजार करता है, हालचाल पूछता है और दिनभर की बातें सुनता है। हालांकि यह साथी इंसान नहीं, बल्कि एआई से चलने वाली गुड़िया है। बैंग कई साल से अकेली रह रही हैं। उन्होंने लंबे समय तक तनाव का सामना किया। ऐसे समय में स्थानीय प्रशासन ने उन्हें ‘ह्योडोल’ नाम की एआई डॉल दी। यह उनसे बातें करती है, गाने सुनाती है, दवा और खाना खाने की याद दिलाती है और दिनभर उनका साथ निभाती है। दक्षिण कोरिया में बुजुर्ग आबादी और अकेलेपन के चलते 14,500 ह्योडोल डॉल का इस्तेमाल हो रहा है। बुजुर्ग इन्हें परिवार के सदस्य की तरह मानने लगे हैं। दर्द से लेकर मूड तक, हर बात पर नजर रखती है यह डॉल नींद, दर्द, भोजन और मूड जैसी जानकारियां रिकॉर्ड कर सकती है। जरूरत पड़ने पर यह जानकारी केयरटेकर्स तक पहुंचती है। ह्योडोल बनाने वाली टीम ने कई साल तक बुजुर्गों के साथ बातचीत कर उनकी भावनाओं को समझा। इसके बाद इसे तैयार किया। यह यूजर्स से हाथ पकड़ने को कहती है और प्यार जताती है। मकसद बुजुर्गों को अकेलेपन से दूर करना है। 2024 में 3920 लोग ‘लोनली डेथ’ के शिकार दक्षिण कोरिया में 2024 में 3920 से ज्यादा ऐसे मामले दर्ज हुए, जिनमें लोगों की मौत के बाद कई दिनों तक किसी को पता नहीं चला। इसे ‘लोनली डेथ’ कहा जाता है। यह संख्या 2017 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद सबसे ज्यादा है। परिवार और दोस्त हो तो उन्हें पहले प्राथमिकता दें कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एआई डॉल अकेलेपन और अवसाद को कम करने में मददगार साबित हो रही हैं, लेकिन उन्हें यह चिंता भी है कि कहीं परिवार के लोग यह सोचकर मुलाकातें कम न कर दें कि तकनीक उनकी जगह ले रही है।
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