अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर ट्रम्प प्रशासन लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। पिछले एक साल में ऐसे कई कदम उठाए गए हैं, जिनसे इमिग्रेंट्स यानी अप्रवासियों का अमेरिका में रहना और काम करना कठिन हो जाए। नौकरियों, स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय सुविधाओं, टैक्स लाभ और बच्चों की डे-केयर सेवाओं तक पहुंच सीमित करने जैसी नीतियों पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य उन सुविधाओं को कम करना है, जो लंबे समय से लोगों को अमेरिका की ओर आकर्षित करती रही हैं। ट्रम्प संसद को दरकिनार रखकर एक्जीक्यूटिव आदेशों के जरिये इमिग्रेशन नीति को नया रूप दे रहे हैं। इस साल की शुरुआत में प्रमुख शहरों में मिलिट्री के छापों और डिपोर्टेशन के खिलाफ तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद ट्रम्प प्रशासन अधिक क्रिएटिव और कम विवादित तरीकों पर अमल कर रहा है। इसके तहत इमिग्रेशन व्यवस्था में बदलाव के साथ हजारों लोगों को नौकरियों से निकालने और सरकारी सुविधाएं छीनने जैसे कदम उठाए गए हैं। ट्रम्प के इमिग्रेशन एजेंडे के प्रमुख रणनीतिकार स्टीफन मिलर का तर्क है कि बड़ी संख्या में आने वाले नए प्रवासी अमेरिका की पहचान, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए चुनौती बन सकते हैं।
एल सल्वाडोर की इमिग्रेंट रेक्वेल मोलिना के मामले से ट्रम्प के अभियान को समझा जा सकता है। मोलिना करीब 30 वर्षों से वैध सोशल सिक्योरिटी नंबर और काम की अनुमति के साथ बोस्टन के लोगान इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमानों की सफाई का काम कर रही थीं। हाल ही में उन्हें और कई अन्य इमिग्रेंट कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया। प्रशासन ने फैसला किया है कि एयरपोर्ट के सुरक्षित क्षेत्रों में अब केवल अमेरिकी नागरिकों, ग्रीन कार्ड धारकों और स्थायी निवासियों को ही प्रवेश मिलेगा। इसी तरह के नियमों के कारण हजारों लोगों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं। अमेरिका में शरण लेने की प्रक्रिया भी कठिन बनाई जा रही है। अपने देशों से भागकर अमेरिका पहुंचने वाले कई शरणार्थियों को वर्क परमिट जारी करने पर रोक लगाई जा रही है। इससे उनके लिए आर्थिक रूपसे आत्मनिर्भर बनना मुश्किल हो सकता है। जापान में भी कई देशों के लोग प्रभावित जापान की सरकार भी ऐसे 47 हजार विदेशियों की जांच कर रही है जो देश में बिजनेस मैनेजर वीसा के तहत रहते हैं। सरकार ने बिजनेस वीसा आवेदकों के लिए पूंजी की सीमा 31 हजार डॉलर से बढ़ाकर एक लाख 88 हजार कर दी है। नए नियम से भारत, नेपाल, श्रीलंका, वियतनाम, थाइलैंड सहित अन्य देशों के लोग अधर में लटक गए हैं। ये जापान के शहरों और गांवों में करी, फ्राइड चावल,नूडल्स और अन्य व्यंजन परोसने वाले रेस्तरां चलाते हैं। सजा की धमकियों के बीच एक लाख से अधिक लोगों ने अमेरिका छोड़ा गिरफ्तारियों और सजा की धमकियों के साथ प्रशासन की रणनीति ने कई आप्रवासियों को भूमिगत होने पर मजबूर कर दिया है। उन्हें टैक्स जमा करने, डॉक्टरों के यहां जाने और यात्रा करने से रोका जाता है। अब तक स्थायी कानूनी दर्जे के बिना रहने वाले एक लाख 16 हजार से अधिक लोग स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ चुके हैं। इनमें सरकार के सेल्फ डिपोर्टेशन प्रोग्राम के तहत गए कुछ लोग भी शामिल हैं। कई लोग सरकार को बताए बगैर जा चुके हैं। पैरेंट के नागरिक न होने पर अमेरिका में जन्मे बच्चों को भी सुविधाएं नहीं मिलेंगी ट्रम्प की रणनीति से स्थायी निवासियों, शरणार्थियों और उनके परिवारों सहित कई वैध इमिग्रेंट्स भी प्रभावित हुए हैं। किसी पैैरेंट के नागरिक न होने की स्थिति में अमेरिका में जन्मे बच्चों को डे-केयर सुविधाएं लेने से रोकने के लिए नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं। ग्रीन कार्ड होल्डरों सहित सभी गैर नागरिकों के सरकारी लोन लेने पर प्रतिबंध है। कई इमिग्रेंट्स को ट्रक ड्राइविंग के लिए कॉमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिए गए हैं।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.