मौत का जाल बनी इमारत की बनावट
बचाव कार्य में जुटी टीमों के मुताबिक, इमारत का डिजाइन ही लोगों की मौत का सबसे बड़ा कारण बना। बेसमेंट के साथ बनी इस चार मंजिला इमारत में बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक ही सीढ़ी थी और कोई ‘इमरजेंसी एग्जिट’ नहीं था। जैसे ही आग फैली, पिछले हिस्से में रहने वाले लोग लोहे की ग्रिल की वजह से बाहर नहीं कूद सके। वहीं, जो लोग जान बचाने के लिए भागकर छत पर पहुंचे, उन्हें वहां ताला लटका मिला।
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सो रहे थे लोग, तभी हुआ धमाका
हादसा सुबह करीब 3:30 बजे हुआ, जब सभी गहरी नींद में थे। चश्मदीदों के अनुसार, एक एसी के फटने से जोरदार धमाका हुआ और आग तेजी से पूरी बिल्डिंग में फैल गई। पास की इमारतों के बीच जगह न होने के कारण आग दूसरी बिल्डिंग तक भी पहुंच गई। मदद के लिए चीख-पुकार मच गई और डर के मारे दो बच्चों ने तो सामने की ओर से कूदने तक की कोशिश की।

दो परिवारों ने खोए अपने सदस्य
दमकल विभाग को एक शव पहली मंजिल से, पांच शव दूसरी मंजिल से और तीन शव सीढ़ियों के पास से मिले। मृतकों में अरविंद जैन (60), उनकी पत्नी, बेटा, बहू और पोता शामिल हैं। वहीं, एक अन्य परिवार के नितिन जैन (50), उनकी पत्नी और बेटे की भी इस हादसे में जान चली गई। पहली मंजिल पर रहने वाली शिखा जैन की भी मौत हो गई, जबकि उनके पति घायल हैं।
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सुरक्षा मानकों की अनदेखी
पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मामले की जांच कर रही हैं। यह साफ हो गया है कि गर्मी और धुएं के कारण ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटने से हुई। इमारत में धुआं निकलने की कोई जगह नहीं थी और सुरक्षा के लिए बंद किए गए रास्तों ने लोगों को भागने का मौका ही नहीं दिया।
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