पेंशनर्स संगठनों ने ToR में बदलाव की उठाई मांग
पेंशनर्स और उनके परिवारों की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए, भारत पेंशनर्स समाज (BPS) और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉयीज फेडरेशन (AIDEF) ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह आयोग के कार्यक्षेत्र (Terms of Reference) में संशोधन करे। इन संगठनों का कहना है कि वर्तमान कार्यक्षेत्र में मौजूदा पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स के लिए पेंशन संशोधन, पेंशन में समानता और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है, इसलिए इसमें बदलाव की सख्त जरूरत है।
AIDEF ने पेंशन के दायरे को बढ़ाने की मांग की
पिछले कुछ महीनों में AIDEF ने वित्त मंत्रालय और कैबिनेट सचिव को कई पत्र लिखे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा कार्यक्षेत्र पुराने पेंशनर्स के लिए पेंशन संशोधन, पुराने और नए पेंशनर्स के बीच समानता, या फैमिली पेंशन के संशोधन को स्पष्ट तौर पर संबोधित नहीं करता है। इसलिए, AIDEF ने प्रस्ताव दिया है कि 1 जनवरी 2026 से पहले या बाद में रिटायर होने वाले सभी कर्मचारियों के लिए पेंशन और पेंशनरी लाभों में संशोधन का प्रावधान जोड़ा जाए।
साथ ही, AIDEF ने कार्यक्षेत्र में unfunded cost वाले संदर्भ पर भी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि सरकारी सेवा के दौरान अर्जित पेंशन को केवल एक बोझ या देनदारी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
BPS ने पेंशन समानता और स्पष्टता की मांग की
8वें वेतन आयोग के गठन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे अपने पत्र में BPS ने भी कार्यक्षेत्र में पेंशन और फैमिली पेंशन संशोधन को शामिल करने की मांग की थी। BPS भी ‘अपर्याप्त लागत’ शब्द को हटाने या उसमें उचित संशोधन करने पर जोर दे रहा है।
उनके पत्र का मुख्य उद्देश्य इस शब्द को कार्यक्षेत्र से हटाना था। इसके अलावा, BPS ने यह स्पष्टीकरण भी मांगा है कि 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनर्स को किसी भी तरह से बाहर नहीं रखा जाएगा और पेंशन से जुड़ी सभी सिफारिशें सेवारत कर्मचारियों के लिए बनने वाली सिफारिशों के साथ-साथ ही लागू की जाएंगी।
BPS की अन्य प्रमुख मांगें क्या हैं?
BPS ने कई अन्य बड़ी मांगें भी उठाई हैं, जिनमें पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना, व्यापक स्वास्थ्य योजनाओं में सुधार के लिए काम करना, 8वें वेतन आयोग के लाभों को केंद्र सरकार द्वारा Funded autonomous and statutory bodies तक विस्तारित करना, और डाक विभाग की रीढ़ माने जाने वाले ग्राम दक्ष सेवकों (GDS) को भी लाभ देना शामिल है।
आगे की राह और आने वाली बैठकें
इन सभी मांगों के पीछे एक समान चिंता साफ दिखती है। पेंशनर्स चाहते हैं कि सरकार स्पष्टता लाए और किसी भी तरह की अस्पष्टता को दूर करे, इससे पहले कि 8वां वेतन आयोग अपनी चल रही बैठकों को समाप्त करके केंद्र सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपे। आने वाले महीनों में चेन्नई, पुडुचेरी, चंडीगढ़ और जयपुर में आयोग की और बैठकें होने वाली हैं।
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