मौजूदा एनुअल इंक्रीमेंट 3% और कर्मचारियों की क्या है मांग
वर्तमान 7वें वेतन आयोग के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों को उनके मूल वेतन पर लगभग 3% की एनुअल इंक्रीमेंट मिलती है। कई कर्मचारी संगठनों ने इस वृद्धि को बढ़ाकर 5% से 7% करने का प्रस्ताव आयोग को सौंपा है। उनका तर्क है कि अधिक वृद्धि दर से कर्मचारियों के लंबी अवधिक के लिए वेतन में इजाफे को बेहतर बनाया जा सकता है। साथ ही, भविष्य में जब फिटमेंट फैक्टर लागू होगा, तो अधिक मूल वेतन का लाभ मिलेगा।
5% एनुअल इंक्रीमेंट पर कितनी बढ़ेगी सैलरी?
अगर एनुअल इंक्रीमेंट को 5% कर दिया जाए तो इसका कर्मचारियों के मूल वेतन पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। आइए एक उदाहरण से समझते हैं…
लेवल 1 के केंद्रीय कर्मचारी का प्रारंभिक बेसिक सैलरी ₹18,000 प्रति माह है। वर्तमान 3% एनुअल इंक्रीमेंट के तहत पांच वर्षों में उनका मूल वेतन लगभग ₹20,900 प्रति माह हो सकता है, लेकिन अगर वृद्धि दर 5% हो जाती है, तो पांच वर्षों में उनका मूल वेतन लगभग ₹24,200 प्रति माह तक पहुंच सकता है। यानी पांच सालों में करीब ₹3,300 का अतिरिक्त अंतर।
अधिक मूल वेतन से और क्या फायदे होंगे?
अधिक बेसिक सैलरी से सिर्फ तनख्वाह ही नहीं बढ़ती, बल्कि इससे जुड़े कई अन्य लाभ भी बढ़ जाते हैं। इनमें महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में योगदान और रिटायरमेंट बेनीफिट्स शामिल हैं। इसलिए बड़ी एनुअल इंक्रीमेंट का असर कर्मचारियों के पूरे वित्तीय जीवन पर पड़ता है।
8वें वेतन आयोग का समयसीमा और आगे की प्रक्रिया
8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। उन्हें अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस अवधि में से 3 अगस्त को 9 महीने पूरे हो जाएंगे। एनुअल इंक्रीमेंट बढ़ाने पर अंतिम फैसला आयोग की अंतिम रिपोर्ट पर निर्भर करेगा, जो संभवतः मई-जून 2027 तक आ सकती है। उसके बाद सरकार इन सिफारिशों पर अपनी मंजूरी देगी।
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