यह कहानी है दिल्ली-NCR के रहने वाले दीर्घ कटारिया की, जो आज दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में से एक माइक्रोसॉफ्ट में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर हैं। कई नाकामियां हासिल करने के बात उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और जॉब मार्केट की डिमांड के हिसाब से नए स्किल्स सीखे।
कौन है दीर्घ कटारिया
यह कहानी है दिल्ली-NCR के रहने वाले दीर्घ कटारिया की, जो आज दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में से एक माइक्रोसॉफ्ट में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर हैं। कई नाकामियां हासिल करने के बात उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और जॉब मार्केट की डिमांड के हिसाब से नए स्किल्स सीखे।
शुरू से पढ़ाई में अव्वल
दीर्घ कटारिया ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली-एनसीआर के एक निजी स्कूल से पूरी की। वे बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे। उन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 91.4% और 12वीं (साइंस स्ट्रीम) में 89.4% अंक हासिल किए। पढ़ाई के साथ-साथ उनकी खेलों में भी गहरी रुचि थी और वे स्कूल स्तर की विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते थे। शुरू से ही वो इंजीनियर बनना चाहते थे। 12वीं में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें एमिटी यूनिवर्सिटी में आसानी से दाखिला मिल गया। यहां से उन्होंने वर्ष 2024 में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) में बीटेक की डिग्री पूरी की। स्नातक के बाद उच्च शिक्षा और बेहतर अवसरों की तलाश में वे विदेश चले गए।
विदेश में पढ़ाई और संघर्ष
मई 2024 में इंजीनियरिंग की बैचलर डिग्री हासिल करने के बाद, दीर्घ ने विदेश में आगे की पढ़ाई और अच्छी नौकरी का सपना देखा। वे आयरलैंड चले और यूनिवर्सिटी कॉलेज डबलिन (UCD) में एमएससी में एडमिशन लिया। पढ़ाई के दौरान वे अलग से अपने स्किल्स को निखारने की कोशिश कर रहे थे और जॉब की तलाश शुरू हो गई थी। अगस्त 2025 में दीर्घ ने डेटा एंड कंप्यूटेशनल साइंस (MSc) की डिग्री हासिल की।
विदेश में सरवाइव करने में दिक्कतें
इसके बाद उनके जीवन का सबसे काला दौर गुजरा। इस दौरान उनके पास न तो नौकरी और ना ही पैसा। यहां तक विदेश में सरवाइव करने में भी दिक्कते आ रही थीं। एनबीटी में छपी एक रिपोर्ट मुताबिक दीर्घ दावा करते हैं कि वो बिना सोए गुजरी कई रातें गुजारी हैं। इतना ही नहीं उन्हें अपने हर कदम पर डाउट होता था। वो कहते हैं कि यह दौर जॉब मार्केट के लिए सबसे बुरे समय में से एक था, साथ ही विदेशी देश में अकेले होने का डर और वीजा की परेशानियां भी थीं। सब कुछ मेरे खिलाफ था, आप जो भी सोच सकते हैं, वो सब।’ हालांकि उस समय भी दीर्घ ने हार नहीं मानी। वे लगातार कोशिश करते रहे।
माइक्रोसॉफ्ट से जॉब ऑफर
करीब 1.5 साल संघर्षों के बाद भारतीय इंजीनियर दीर्घ कटारिया का विदेश में अच्छी नौकरी का सपना सच हो गया। अप्रैल 2026 में उन्हें दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट से जॉब ऑफर मिला। दीर्घ को Azure VNET Team में सॉफ्टवेयर इंजीनियर IC2 पद दिया गया। इस पद पर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का अनुमानित सालाना सैलरी पैकेज 70 से 90 लाख रुपये हो सकता है।
छात्रों को क्या सीखना चाहिए
हार न मानें: 850 रिजेक्शन के बावजूद दीर्घ ने कोशिश जारी रखी और हर असफलता से सीख लेकर खुद को बेहतर बनाया।
नई स्किल्स सीखें: नौकरी की मांग के अनुसार Python, C#, .NET, Cloud, SQL, DSA और Automation जैसी स्किल्स सीखीं और प्रोजेक्ट्स बनाए।
सोशल मीडिया से बचें: उनका मानना है कि सोशल मीडिया पर सिर्फ सफलता दिखती है, संघर्ष नहीं।
रिजेक्शन को अवसर बनाएं: हर इंटरव्यू और असफलता से सीखें और अगली बार बेहतर तैयारी के साथ आगे बढ़ें।
(डिस्क्लेमर: इस कहानी में किए गए सभी दावे और विचार संबंधित व्यक्ति के निजी अनुभव हैं। ‘लाइव हिंदुस्तान’ वेबसाइट सोशल मीडिया पोस्ट पर किए गए इन दावों की पुष्टि नहीं करती है।)
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.