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गुजरात के गिर जंगल क्षेत्र में दो शेर शावकों की संदिग्ध बाबेसिया वायरस संक्रमण से मौत हो गई है। वहीं, तीन अन्य शेरों की अलग-अलग घटनाओं में प्राकृतिक कारणों और आपसी संघर्ष में जान गई। राज्य के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि गिर जंगल में किसी बड़े संक्रमण या महामारी जैसी स्थिति नहीं है। उन्होंने बताया कि बेबेसिया वायरस से केवल दो संदिग्ध मौतें जुड़ी हैं, जबकि बाकी तीन शेरों की मौत अन्य कारणों से हुई है।
मोढवाडिया ने बताया कि बाबेसिया वायरस टिक यानी किलनी के जरिए फैलता है। इससे संक्रमित जानवरों में कमजोरी, खांसी और नाक से स्राव जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि वन विभाग और पशु चिकित्सकों की टीमें वायरस के फैलाव को रोकने में जुटी हैं। संदिग्ध शेरों की पहचान की जा रही है, उनके सैंपल लिए जा रहे हैं और इलाज भी किया जा रहा है। इससे पहले 2018 में बेबेसिया वायरस से ही एक महीने के भीतर 11 शेरों की मौत हुई थी।

अलग-अलग रेंज में हुई शावकों की मौत
प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (वाइल्डलाइफ) जयपाल सिंह ने कहा कि ये अलग-अलग घटनाएं हैं और इनमें कुछ भी असामान्य नहीं है। तीनों शावकों की मौत फॉरेस्ट के अलग-अलग रेंज में हुई है। इसलिए किसी महामारी जैसी स्थिति की बात नहीं है।
लिलिया रेंज में 1, सावरकुंडला रेंज और सरसिया रेंज में 1 शावक की मौत हुई है। इनमें से जिन दो शावकों की मौत हुई, वे बहुत छोटे थे। वहीं, दो अन्य शेरों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, जबकि एक शेर की जान आपसी संघर्ष में गई है। इनकी मौत का वायरस से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि आमतौर पर शावकों की जीवित रहने की दर आमतौर पर 50 फीसदी ही होती है। लेकिन गिर फॉरेस्ट में लगातार निगरानी, ट्रैकर्स और बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाओं की वजह से शेरों की मृत्यु दर काफी कम है।

2018 में बेबेसिया वायरस से ही एक महीने के भीतर 11 शेरों की मौत हुई थी।
बेबेसिया वायरस क्या है?
बेबेसिया एक बहुत ही गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो मनुष्यों के साथ-साथ जानवरों और वन्यजीवों में भी पाई जाती है। यह बेबेसिया नामक परजीवी (प्रोटोजोआ) द्वारा फैलती है। मलेरिया की तरह, ये परजीवी शरीर में प्रवेश करते हैं और सीधे लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) पर हमला करके उन्हें नष्ट कर देते हैं।
वहीं, शेरों में यह परजीवी रोग किलनी द्वारा फैलता है। वायरस शेरों की लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इससे शरीर में गंभीर एनीमिया हो जाता है, जिससे उनकी मौत हो जाती है।

एशियाई शेरों की संख्या 891 दर्ज की गई है
गुजरात में एशियाई शेरों की कुल संख्या 891 है। सितंबर, 2025 में विधानसभा में CM भूपेंद्र पटेल ने शेरों की गिनती के बाद नए आंकड़े जारी किए थे। साल 2020 में 674 शेर थे, जो अब बढ़कर 891 हो गए हैं। इनमें 196 शेर, 330 शेरनियां और 225 शावक शामिल हैं।
इस साल 10 से 13 मई 2025 के बीच अत्याधुनिक तकनीक से शेरों की गिनती की गई थी। इसके आधार पर यह आंकड़ा जारी किया गया था। गुजरात के 11 जिलों की 58 तहसीलों में शेरों की उपस्थिति दर्ज की गई है। राज्य के 7 जिलों… जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली, भावनगर, द्वारका, पोरबंदर और राजकोट जिलों तक शेरों की बसाहट दर्ज कई गई है।
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