अमेरिका के 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज 2026 में भारतीय-अमेरिकी छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस साल प्रतियोगिता के टॉप 10 फाइनलिस्ट में पांच भारतीय अमेरिकी मिडिल स्कूल के छात्रों ने जगह बनाई। इनमें से एक नाम राजी दोशी का है।
गंभीर चिंता का विषय
समुद्र की बढ़ती अम्लियता दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। इसकी वजह यह है कि पृथ्वी के महासागर वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का बड़ा हिस्सा अपने भीतर अवशोषित कर लेते हैं। जैसे-जैसे अधिक CO₂ समुद्री पानी में घुलती है, पानी अधिक अम्लीय होता जाता है। इससे प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs), शेलफिश और अन्य समुद्री जीवों के लिए अपने खोल और कंकाल का निर्माण तथा संरक्षण करना कठिन हो जाता है।
राजी दोशी ने क्या किया है काम
यंग साइंटिस्ट लैब की वेबसाइट पर उपलब्ध फाइनलिस्ट प्रोफाइल के अनुसार, राजी दोशी के प्रोजेक्ट में यह जांच की गई है कि क्या शैवाल (Algae) और प्राकृतिक कैल्शियम (अरागोनाइट) का संयुक्त उपयोग समुद्र की बढ़ती अम्लता को कम करने में मददगार हो सकता है। उनके इस अभिनव विचार ने उन्हें इस वर्ष की प्रतियोगिता के फाइनलिस्ट में जगह दिलाई है। अब वह प्रतियोगिता के 25,000 डॉलर (करीब 21 लाख रुपये) के ग्रैंड प्राइज के लिए अन्य प्रतिभागियों के साथ मुकाबला कर रही हैं।
जीवों पर अम्लियता का दुष्प्रभाव होगा कम
राजी दोषी का प्रोजेक्ट किसी एक समाधान पर निर्भर नहीं है। इसके बजाय, इसमें यह अध्ययन किया गया है कि शैवाल (Algae) और प्राकृतिक कैल्शियम (अरागोनाइट) की ये दोनों प्राकृतिक प्रक्रियाएं मिलकर किस तरह काम कर सकती हैं, ताकि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystem) के लिए अधिक स्वस्थ और संतुलित वातावरण तैयार किया जा सके। इससे समुद्री जीवों पर बढ़ती अम्लता के दुष्प्रभाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
कैसे काम करेगा यह प्रस्तावित सिस्टम?
राजी दोशी के प्रोजेक्ट सारांश के अनुसार, इस प्रस्तावित सिस्टम में प्राकृतिक कैल्शियम (अरागोनाइट) का उपयोग किया गया है, जो समुद्री पानी की क्षारीयता (Alkalinity) बढ़ाकर उसकी बढ़ती अम्लता को कम करने में मदद कर सकता है। चूंकि कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) समुद्र की अम्लता बढ़ने का प्रमुख कारण है, इसलिए इसकी मात्रा कम होने से समुद्री जल की रासायनिक संरचना में होने वाले नकारात्मक बदलावों को धीमा किया जा सकता है।
क्या है 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज
यह अमेरिका की सबसे बड़ी विज्ञान प्रतियोगिता में से एक है. जिसमें कक्षा 5 से 8 तक के छात्र हिस्सा लेते हैं। प्रतियोगिता के विजेताओं को 25,000 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 21 लाख रुपये की पुरस्कार राशि और अमेरिका का टॉप यंग साइंटिस्ट का खिताब दिया जाएगा।
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