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अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी आईसीई (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) प्रोग्राम में बड़े पैमाने पर कथित फर्जीवाड़े की जांच शुरू की है।
अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय छात्रों के लिए नई चिंता खड़ी हो गई है। अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी आईसीई (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) प्रोग्राम में बड़े पैमाने पर कथित फर्जीवाड़े की जांच शुरू की है। जांच के दायरे में करीब 10,000 विदेशी छात्र बताए जा रहे हैं, इनमें बड़ी संख्या भारतीय छात्रों की है।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि कई छात्रों ने ऐसी शेल कंपनियों या फर्जी कंपनियों के जरिए नौकरी दिखाकर अपना वीसा स्टेटस बचाए रखा, जिनका असली कारोबार लगभग नहीं था। कुछ कंपनियां सिर्फ छात्रों को कानूनी रोजगार दिखाने और वीसा नियमों से बचाने के लिए ही बनाई गई थीं। जांच में कई कंपनियों के पते खाली इमारतों, बंद ऑफिसों या रिहायशी मकानों में मिले। कुछ मामलों में कंपनियों के अमेरिकी ऑफिस की जगह भारत में बैठे एचआर एजेंट छात्रों को मैनेज करते पाए गए।
आईसीई के कार्यकारी निदेशक टॉड लायंस ने कहा कि जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन के दौरान शुरू किए गए ओपीटी कार्यक्रम में केवल कुछ हजार लाभार्थियों के प्रशिक्षण प्राप्त करने और फिर घर लौटने की उम्मीद थी। इसके बजाय, ओपीटी के जरिये लाखों विदेशी छात्र अमेरिका में काम कर रहे हैं। कार्यक्रम का आकार बढ़ने के साथ ही धोखाधड़ी भी बढ़ गई है।
हालांकि जांच एजेंसियों ने साफ किया है कि कार्रवाई किसी देश विशेष या सभी भारतीय छात्रों के खिलाफ नहीं है, बल्कि केवल संदिग्ध नेटवर्क और कंपनियों पर केंद्रित है। फिर भी इस कार्रवाई ने अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे भारतीय छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
ओपीटी प्रोग्राम से पढ़ाई के बाद नौकरी में आसानी
ओपीटी प्रोग्राम अमेरिका में एफ-1 स्टूडेंट वीजा पर पढ़ने वाले विदेशी छात्रों को पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी करने की अनुमति देता है। एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) संकाय के छात्रों को इसके जरिये 36 महीने तक काम करने का मौका मिलता है। भारतीय छात्रों के लिए यह प्रोग्राम एच-1बी वीजा और अमेरिका में लंबा करियर बनाने की महत्वपूर्ण सीढ़ी माना जाता है। आंकड़ों के अनुसार 68,000 भारतीय ओपीटी छात्र हाल के वर्षों में कई अमेरिकी टेक कंपनियों में काम कर रहे हैं।
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