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योगी ने आगे कहा कि दुर्भाग्य से, 2017 से पहले, राज्य सरकार खुद राज्य के लिए एक बुरा शगुन बन गई थी। उस समय, युवाओं के लिए शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई थी, और कौशल विकास के लिए कोई प्रावधान नहीं थे। असुरक्षा का माहौल था। सरकारी नौकरियों पर एक ही परिवार का एकाधिकार था। विपक्ष पर तंज कसते हुए योगी ने कहा कि वर्ष 2017 के पहले… सरकारी नौकरी पर एक खानदान का अधिकार था। नौकरी निकलती नहीं थी, निकल गई तो चाचा-भतीजे की जोड़ी वसूली के लिए भी निकल पड़ती थी। उन्होंने कहा कि यूपी का नौजवान यूपी में काम पाए, यह एक कल्पना थी। लेकिन अब यह साकार हो रही है।
दूसरी ओर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की घटना से हम जैसे राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है लेकिन इस मामले के बहाने अयोध्या और राम जन्मभूमि को बदनाम करना उचित नहीं है। ‘इंडिया टुडे समूह’ के कार्यक्रम ‘‘पंचायत आज तक’’ को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अपने पुराने रिकॉर्ड के बावजूद आस्था से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या की घटना ने निश्चित रूप से हम सभी की, हम जैसे राम भक्तों की आस्था को चोट पहुंचाई है। ‘राम मंदिर ट्रस्ट’ एक स्वतंत्र संस्था है और सरकार को इसके मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। ट्रस्ट ने जांच का अनुरोध किया और राज्य सरकार ने एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन किया। जैसे ही एसआईटी की रिपोर्ट आई, कार्रवाई शुरू कर दी गई।
उन्होंने कहा कि चोरी की घटना में कथित रूप से शामिल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनकी सहायता करने के आरोप में दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है। योगी ने कहा कि गिरफ्तारी के साथ-साथ नैतिक आधार पर दो इस्तीफे भी हुए हैं, जिनमें ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा शामिल हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन इस घटना का इस्तेमाल अयोध्या, राम जन्मभूमि और हिंदुओं की आस्था को बदनाम करने के लिए करना उचित नहीं है। सपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग अब आस्था की बात कर रहे हैं, उन्होंने पहले धार्मिक परंपराओं के खिलाफ काम किया था।
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उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 से पहले की अवधि को याद करें। समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान, कांवड़ यात्रा, रामनवमी जुलूस, जन्माष्टमी समारोह और दुर्गा पूजा पंडालों की अनुमति नहीं थी। जिन लोगों ने ऐसे त्योहारों पर प्रतिबंध लगाया था, वे आज आस्था की बात कर रहे हैं। यह विडंबना है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि अयोध्या में कारसेवकों पर गोलीबारी के जिम्मेदार अब धार्मिक आस्था की बात कर रहे हैं। उन्होंने पिछली सरकारों पर हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज की इजाजत देकर ‘माहौल खराब करने’ की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘अगर वे वास्तव में धर्मनिरपेक्ष थे, तो उन्हें मस्जिद के अंदर हनुमान चालीसा का पाठ करने की भी अनुमति देनी चाहिए थी, लेकिन यह एकतरफा दृष्टिकोण था।
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