नयी दिल्ली, नौ सितंबर भारतीय कुश्ती के लिए एक और शर्मिंदगी की स्थिति पैदा हो गई जब एशियाई खेलों के लिए चुने गए ग्रीको रोमन पहलवान दीपक डोप परीक्षण में प्रतिबंधित पदार्थ क्लोमीफीन के सेवन के दोषी पाए गए हैं जिसके बाद भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने उन्हें टीम से वापस लेने का फैसला किया। इससे महाद्वीपीय खेलों में भारत की कुश्ती चुनौती और कमजोर हो गई है। भारत पहले ही डोपिंग मामलों के कारण एशियाई खेलों की कुश्ती टीम में दो स्थान गंवा चुका है।
पुरुष फ्रीस्टाइल 86 किग्रा वर्ग के मुकुल दहिया और ग्रीको रोमन 130 किग्रा वर्ग के दीपांशु के खिलाफ डोपिंग मामले सामने आए थे। दीपक भारतीय डाक सेवा से एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने वाले पहले पहलवान थे। दिल्ली के 25 वर्षीय पहलवान ने 31 मई को लखनऊ में हुए चयन ट्रायल में अप्रत्याशित जीत दर्ज कर टीम में जगह बनाई थी।
इससे पहले उन्होंने फेडरेशन कप में पदक जीतकर प्रभावित किया था। राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार चयन ट्रायल के दौरान लिए गए दीपक के मूत्र के नमूने में क्लोमीफीन की मौजूदगी पाई गई। क्लोमीफीन 2026 की विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) की प्रतिबंधित सूची में एस4 (हार्मोन और मेटाबोलिक मॉड्यूलेटर्स) श्रेणी में प्रतिबंधित पदार्थ है।
नाडा ने बताया कि नमूने में 23 जुलाई को असामान्य निष्कर्ष सामने आया। इसके बाद जांच और 17 अगस्त को पहलवान के साथ साक्षात्कार के बाद मामले को प्रतिकूल विश्लेषणात्मक निष्कर्ष (एएएफ) के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया गया। क्लोमीफीन का इस्तेमाल आमतौर पर पुरुषों और महिलाओं में बांझपन के इलाज के लिए किया जाता है।
नाडा की अधिसूचना में यह नहीं कहा गया है कि दीपक को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि मामले के निपटारे तक उन पर अस्थायी निलंबन नहीं लगाया गया है और वह प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकते हैं जब तक कि बाद में उन पर निलंबन नहीं लगाया जाता। हालांकि अधिसूचना में कहा गया है कि यदि डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन (एडीआरवी) की पुष्टि होती है तो 31 मई 2026 यानी नमूना लिए जाने की तारीख से लेकर किसी भी अस्थायी निलंबन की शुरुआत तक हासिल किए गए परिणामों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
यदि बी नमूने में क्लोमीफीन की मौजूदगी की पुष्टि होती है या दीपक बी नमूने की जांच कराने से इनकार करते हैं तो लागू डोपिंग रोधी नियमों के तहत एडीआरवी की पुष्टि हो जाएगी। डब्ल्यूएफआई के एक अधिकारी ने कहा कि महासंघ दीपक को टीम से हटा रहा है क्योंकि अगर एशियाई खेलों के दौरान उनका नमूना फिर से पॉजिटिव आता है तो विश्व कुश्ती की संचालन संस्था यूडब्ल्यूडब्ल्यू, डब्ल्यूएफआई पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगा सकती है। अधिकारी ने कहा, ‘‘दीपक ने ट्रायल जीतकर कोच को वाकई हैरान किया था।
वह कभी राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा नहीं रहे, इसलिए उनका पर्याप्त परीक्षण भी नहीं हुआ। उन्होंने फेडरेशन कप में पदक जीतने के बाद ट्रायल के जरिए टीम में जगह बनाई।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम उन्हें टीम से हटा रहे हैं।’’
डब्ल्यूएफआई का कहना है कि अगर उसे प्रतिकूल डोपिंग नतीजों की जानकारी समय पर मिल जाती तो वह तीनों कोटा स्थान बचा सकता था। अधिकारी ने कहा, ‘‘दीपांशु का परीक्षण मार्च में हुआ था और हमें उसका नतीजा जुलाई में मिला।
इसी तरह मुकुल और दीपक के नमूने 31 मई को लिए गए और हमें उनके नतीजे अब मिल रहे हैं। अगर हमें नतीजों की जानकारी पहले मिल जाती तो हम उनके नाम नहीं भेजते। हम उनकी जगह दूसरे पहलवानों को भेज सकते थे लेकिन अब कुछ नहीं किया जा सकता।’’
पहलवान को ‘ए’ नमूने के नतीजे को चुनौती देने का अधिकार है।
इसके लिए वह बी नमूने की जांच का अनुरोध कर सकते हैं। नोटिस प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर उन्हें इस अधिकार इस्तेमाल करना होगा।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.