फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया। जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फोन के बाद फीफा ने अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन के रेड कार्ड को रद्द कर दिया और बालोगुन को बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मैच खेलने की परमीशन भी दी गई। हालांकि, बालोगुन के खेलने के बाद अमेरिका की टीम राउंड ऑफ 16 मैच में बेल्जियम के खिलाफ 1-4 से हारकर बाहर हो गई। फुटबॉल वर्ल्ड कप के इतिहास में संभवत: यह पहला मामला है, जब किसी राष्ट्राध्यक्ष ने फीफा से किसी खिलाड़ी की पैरवी की हो और फीफा ने इसे स्वीकार भी कर लिया है। बालोगुन के मामले में फीफा के फैसले के बाद बेल्जियम फुटबॉल संघ और यूरोपियन फुटबॉल यूनियन ने फीफा का विरोध किया है। बालोगुन को बोस्निया के खिलाफ रेड कार्ड दिखाया गया था 25 साल के बालोगुन को पिछले नॉकआउट मुकाबले में रेड कार्ड मिला था, जिसके बाद नियमों के अनुसार उन्हें एक मैच का निलंबन झेलना चाहिए था। इसके बावजूद फीफा ने उन्हें बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मुकाबले में खेलने की मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद बेल्जियम फुटबॉल महासंघ ने फीफा के खिलाफ अपील दायर की। बालोगुन ने अब तक इस टूर्नामेंट में तीन गोल किए हैं। 1962 में गैरिंचा का रेड कार्ड रद्द हुआ था यह वर्ल्ड कप के इतिहास में रेड कार्ड रद्द होने का दूसरा मामला है। पहला मामला 1962 में सामने आया था। तब ब्राजील के गैरिंचा को सेमीफाइनल में चिली के खिलाफ रेड कार्ड दिखाया गया था। लेकिन, गैरिंचा ने फाइनल में हिस्सा लिया और चेकोस्लोवाकिया पर जीत हासिल की। क्योंकि, उस समय रेड कार्ड के बाद खिलाड़ी पर प्रतिबंध नहीं लगता था, बल्कि अधिकारी सबूतों के आधार पर सजा तय करते थे। 1962 में फीफा की अनुशासनात्मक समिति का निर्णय राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से घिरा हुआ था। ट्रम्प ने दखल देने की बात मानी मैच से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बालोगुन रेड कार्ड मामले में दखल देने की बात को स्वीकार किया। उन्होंने सोमवार को व्हाइट हाउस में कहा कि उन्होंने ही फीफा से कहा था कि वे अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगाए गए एक मैच के बैन की समीक्षा (रिव्यू) करे। ट्रम्प ने कहा- मैंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बात की थी और फैसले की समीक्षा करने के लिए कहा था। क्योंकि, मुझे नहीं लगता था कि यह फाउल था। उन्होंने कहा- फीफा ने सही निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि अगर प्रतिबंध लागू किया जाता, तो टूर्नामेंट पर एक बड़ा धब्बा लग जाता। बेल्जियम और नॉर्वे ने उठाए सवाल बेल्जियम फुटबॉल महासंघ का आरोप है कि फीफा ने उसकी अपील के लिए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। वहीं, नॉर्वे फुटबॉल महासंघ ने कहा कि फीफा की ओर से कानूनी आधार स्पष्ट नहीं किए जाने से प्रतियोगिता की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। महासंघ ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया। फीफा ने फैसले का किया बचाव इन्फेंटिनो ने सोशल मीडिया पर कहा कि अनुशासन समिति ने पूरी स्वतंत्रता के साथ निर्णय लिया है और हर मामले का मूल्यांकन संबंधित नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया जाता है। हालांकि, इस फैसले ने विश्व कप के दौरान फीफा की पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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