- कंपनियां अभी भी केवल कानूनी अनुपालन के लिए बीमा खरीद रही हैं।
Workplace Risk Report 2026: आज के टाइम में बड़े-छोटे हर सेक्टर में कर्मचारियों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. बढ़ते काम के दबाव, मशीनों के ज्यादा इस्तेमाल के चलते हादसों का खतरा भी बढ़ रहा है. इसी बीच भारत के MSME सेक्टर में काम की जगह पर होने वाली दुर्घटनाओं के मामलों में बड़ा इजाफा देखने को मिल रहा है.
1 मई लेबर डे यानी आज से पहले जारी बीमाकवच वर्कप्लेस रिस्क रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में वर्कप्लेस इंजरी क्लेम्स में सालाना आधार पर 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह औद्योगिक गातिविधियों का बढ़ना, बेहतर रिपोर्टिंग सिस्टम और बीमा कवरेज का विस्तार है.
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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे ज्यादा हुआ प्रभावित
रिपोर्ट में 6 हजार से ज्यादा MSME कंपनियों के डेटा का अध्ययन किया गया है. इस रिपोर्ट में सामने आया कि सबसे ज्यादा हादसे फैक्ट्री और मैक्युफैक्चरिंग में हो रहे हैं.
इन हादसों के पीछे की मुख्य वजह है जैसे…
- मशीनों से जुड़े हादसे
- साथ ही फिसलकर गिरना
- कंस्ट्रक्शन वर्क के दौरान गंभीर चोट लगना
वहीं IT और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बीमा पॉलिसी लेने वाली कंपनियों की संख्या ज्यादा होने के बाद भी दुर्घटना के दावे लगभग जीरो रहे.
इस मौसम में बढ़ जाता है खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच वर्कप्लेस दुर्घटनाओं का खतरा ज्यादा रहता है. कुल दावों में 43 प्रतिशत हिस्सा मॉनसून महीनों का रहा है. हैरानी की बात तो यह है कि अकेले जुलाई में 13.4 प्रतिशत दावे दर्ज हुए. क्योंकि भारी बारिश होने के कारण फिसलने का खतरा बढ़ जाता है.
इन राज्यों में सबसे ज्यादा जोखिम
वर्कप्लेस जोखिम सबसे ज्यादा औद्योगिक राज्यों में देखा गया है. महाराष्ट्र 20 प्रतिशत, गुजरात, कर्नाटक, दिल्ली. ये चारों राज्य मिलकर कुल पॉलिसियों के आधे से ज्यादा हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं.
नियमों का पालन अभी भी मुख्य वजह
रिपोर्ट के मुताबिक, 94.6 प्रतिशत MSME कंपनियां वर्कमेन कंपनसेशन इंश्योरेंस केवल कानूनी नियमों को पूरा करने के लिए खरीदती हैं. लेकिन अब धीरे-धीरे कंपनियों की सोच बदल रही है और वे कर्मचारियों की सुरक्षा को गंभीरता से ले रहे हैं.
डिजिटल प्रोसेस से तेजी
बीमा सेक्टर में डिजिटल बदलाव के चलते पॉलिसी जारी होने की प्रक्रिया काफी तेज हुई है.
- 69.1 प्रतिशत पॉलिसी उसी दिन जारी हुईं
- 82 प्रतिशत पॉलिसी तीन दिन के अंदर एक्टिवेट हुईं
यह पारंपरिक 3-7 दिनों की प्रक्रिया से काफी तेज है.
क्या बोले BimaKavach के CEO?
BimaKavach के फाउंडर और CEO तेजस जैन ने कहा कि अब वर्कप्लेस रिस्क को नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है. उनके मुताबिक क्योंकि जोखिम केवल शारीरिक चोट तक सीमित नहीं है, बल्कि नियमों की अनदेखी और वित्तीय कमजोरियां भी बड़ा खतरा है.
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