भारत ने आखिरकार वह कर दिखाया जिसकी उसे जरूरत थी। महिला हॉकी विश्व कप के पूल डी के आखिरी मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ 0-0 से ड्रॉ खेलते हुए भारतीय टीम ने दूसरे दौर में अपनी जगह पक्की कर ली है। मुकाबला भले ही गोलरहित रहा, लेकिन आखिरी सीटी तक दोनों टीमों के बीच तनाव बना रहा। इंग्लैंड को आगे बढ़ने के लिए हर हाल में जीत चाहिए थी, जबकि भारत के लिए बराबरी भी काफी थी।
इस नतीजे के साथ भारत ने तीन मैचों में पांच अंक जुटाए और पूल डी में दूसरे स्थान पर रहा। चीन सात अंकों के साथ पूल में पहले स्थान पर रहा और भारत के साथ अगले दौर में पहुंच गया। इंग्लैंड चार अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा और उसका विश्व कप अभियान यहीं समाप्त हो गया।
गौरतलब है कि भारत ने प्रतियोगिता की शुरुआत चीन के खिलाफ 2-2 की बराबरी से की थी। इसके बाद टीम ने दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराकर शानदार प्रदर्शन किया। इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले में भी भारत ने शुरुआती मिनटों में बेहतर आक्रमण किया और पहले दस मिनट के दौरान तीन पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए, लेकिन टीम उन्हें गोल में नहीं बदल सकी।
इसके बाद इंग्लैंड ने धीरे-धीरे मुकाबले पर पकड़ बनानी शुरू कर दी। दूसरे क्वार्टर में इंग्लैंड को तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले, जबकि भारत को एक मौका मिला। दोनों टीमों के गोलकीपरों ने कई अच्छे बचाव किए और मध्यांतर तक स्कोर 0-0 ही रहा।
दूसरे हाफ में इंग्लैंड का दबाव और बढ़ गया। तीसरे क्वार्टर में उसने पांच पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए, जबकि भारत को सिर्फ एक मिला। भारतीय टीम धीरे-धीरे अपने घेरे के आसपास ज्यादा समय बिताने लगी और डिफेंस लाइन को मजबूत रखते हुए इंग्लैंड के हमलों को रोकती रही।
मौजूद जानकारी के अनुसार, पूरे मुकाबले में इंग्लैंड ने कुल 12 पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए, जबकि भारत को छह मिले। इसके बावजूद इंग्लैंड एक भी मौका गोल में नहीं बदल पाया। बिचु देवी और अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने कई अहम मौकों पर भारत को बचाया।
असली परीक्षा आखिरी क्वार्टर में हुई। इंग्लैंड को पता था कि बराबरी उसके लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए उसने गोलकीपर को मैदान से बाहर बुलाकर एक अतिरिक्त मैदानी खिलाड़ी उतार दिया। इसके बाद इंग्लैंड ने 11 खिलाड़ियों के साथ भारतीय घेरे पर लगातार हमला किया। भारत लगभग पूरी तरह रक्षात्मक भूमिका में आ गया।
भारतीय खिलाड़ियों ने इस दबाव के बावजूद अपनी एकाग्रता नहीं खोई। इंग्लैंड के हमले लगातार भारतीय रक्षापंक्ति से टकराते रहे। मुकाबला खत्म होने से कुछ सेकंड पहले टेसा हॉवर्ड के पास इंग्लैंड को जीत दिलाने का शानदार मौका आया, लेकिन बिचु देवी ने बेहतरीन बचाव करते हुए गेंद को रोक दिया। उनका यह बचाव भारत के लिए निर्णायक साबित हुआ।
अंतिम सीटी बजते ही भारतीय खिलाड़ियों ने राहत की सांस ली। इंग्लैंड ने मैच के बड़े हिस्से में दबदबा बनाया और भारत की तुलना में दोगुने पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए, लेकिन गोल करने में नाकाम रहा।
बता दें कि भारत अब तक विश्व कप में अजेय है। टीम ने एक जीत और दो ड्रॉ के साथ पांच अंक हासिल किए हैं। अगले दौर में चुनौती और कठिन होगी, लेकिन इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ दबाव में डटे रहने से भारतीय टीम का आत्मविश्वास जरूर बढ़ा होगा। अब भारत की नजर टूर्नामेंट के अगले चरण में बेहतर प्रदर्शन करते हुए खिताब की दौड़ को आगे बढ़ाने पर होगी।
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