व्रत के चावल के नाम से मशहूर समा या समक को व्रत में क्यों खाते हैं? आपके दिमाग में ऐसे सवाल आते होंगे ना क्योंकि व्रत के फलाहार में तो अनाज और दालें वगैरह खाने का निषेध होता है फिर इस अनाज को क्यों फलाहारी मानते हैं, जानें जवाब…
क्या है समा या समक और क्यों व्रत में खाते हैं?
जिस समा के चावल या समक के चावल को व्रत में खाने की सलाह दी जाती है। दरअसल, वो कोई चावल की वैराइटी नही हैं। बल्कि ये एक तरह का मोटा अनाज है और अगर पूरी तरह डिटेल में जाएं तो ये एक जंगली घास का बीज होता है। जिसे कई नामों से जाना जाता है। कोदों,वरई, कदरी, संवत, मोरधन और जंगली चावल के नाम से भी लोग जानते हैं। महाराष्ट्र में इसे भगवान और वाराय भी लोग बोलते हैं। चूंकि ये सीधे अनाज ना होकर एक बीज होता है इसलिए व्रत में खाने योग्य इसे माना जाता है और लोग इसे व्रत के चावल के नाम से भी जानते हैं। समा या समक को बर्नयार्ड मिलेट की कैटेगरी में शामिल किया जाता है और इसके कई सारे फायदे हैं। समा में न्यूट्रिशन की मात्रा के साथ ही ग्लाइसेमिक इंडेक्स की मात्रा भी बाकी अनाज की तुलना में कम होती है।
समा के चावल में कौन से न्यूट्रिशन होते हैं?
समा के चावल में कार्बोहाइड्रेट के साथ ही प्रोटीन, विटामिन ए, सी और ई, कैल्शियम, पोटैशियम, फास्फोरस, आयरन और मैग्नीशियम होता है। वहीं हाई फाइबर की मात्रा के साथ ही समा का ग्लाइसेमिक इंडेक्स मात्र 50 होता है। इसी वजह से डायबिटीज के मरीजों के लिए ये खाने का अच्छा ऑप्शन है। फाइबर की मात्रा ज्यादा होने की वजह से ये ब्लड शुगर को भी कंट्रोल करता है।
पचने में आसान
समक चावल में 100 ग्राम में करीब 13 ग्राम फाइबर होता है जो गट बैक्टीरिया को हेल्दी रखने के साथ ही डाइजेशन को बढ़ाता है और पेट को भरा रखता है। यहीं नहीं 100 ग्राम समक खाया तो इसमे 10.5 ग्राम प्रोटीन की मात्रा मिल जाती है। जो वेजिटेरियन लोगों के लिए प्रोटीन का भी अच्छा सोर्स है।
समक की इन्हीं खासियत की वजह से इसे व्रत के आहार में शामिल किया जाता है। और, जिन्हें व्रत में शुद्ध, सात्विक और फलाहारी भोजन करना होता है वो समक के चावलों को खाना पसंद करते हैं।
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