पिछले कुछ साल में भारत में सोलर पैनल लगवाने की संख्यां काफी बढ़ी है। सरकार की तरफ से पीएम सूर्य घर योजना की तरफ से सब्सिडी मिलने की वजह से दूर-दराज के इलाकों में ज्यादातर लोग सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं। आम तौर पर तीन तरह के सोलर सिस्टम लगाए जाते हैं, जिनमें ऑफ ग्रिड, ऑन ग्रिड और हाइब्रिड सिस्टम हैं।
क्या है हाइब्रिड सोलर सिस्टम?
ऑफ ग्रिड सिस्टम उन लोकेशन पर लगाए जाते हैं जहां आस पास पावरग्रिड की सप्लाई नहीं है यानी मीटर का कनेक्शन नहीं हुआ है। वहीं, ऑन ग्रिड और हाइब्रिड सिस्टम को उन जगहों पर लगाया जाता है, जहां पावरग्रिड की पहुंच है। ऑन ग्रिड सिस्टम को ज्यादातर शहरी क्षेत्र में लगाया जाता है क्योंकि यहां बिजली कम जाती है। वहीं, हाइब्रिड सिस्टम उन जगहों के लिए बढ़िया होता है, जहां बिजली आती तो है लेकिन पावर कट की समस्या रहती है।
ऑन ग्रिड और हाइब्रिड सिस्टम में केवल यही अंतर है कि हाइब्रिड सिस्टम में पावर बैकअप के लिए बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, ऑन ग्रिड सिस्टम में बिजली स्टोर करने के लिए बैटरी नहीं लगाई जाती है। सोलर पैनल से बनने वाली बिजली घर का लोड चलाने के लिए यूज होता है। बची हुई बिजली ग्रिड को भेजी जाती है, जिसे रात के समय में इस्तेमाल किया जाता है।
अगर, आप भी 5kW हाइब्रिड सिस्टम लगवाना चाहते हैं तो आपके मन में ये सवाल जरूर आ रहा होगा कि इसमें क्या खर्च आएगा? सब्सिडी कितनी मिलेगी? कितना लोड चला सकते हैं? हम आपको इससे जुड़ी सारी जानकारी विस्तार से बताने जा रहे हैं।
हाइब्रिड सोलर सिस्टम का कितना आएगा खर्च?
भारत में 5 किलोवाट का हाइब्रिड सिस्टम लगवाने में आपको 2,00,000 रुपये से लेकर 3,50,000 रुपये तक का खर्च आ सकता है। इस खर्च में सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी को शामिल नहीं किया गया है। सोलर प्लांट लगवाने में खर्च का जो अंतर है वो बैटरी स्टोरेज पर निर्भर करता है।
5 किलोवाट के सोलर पैनल के लिए आपको 90,0000 रुपये से लेकर 1,50,000 रुपये तक का खर्च करना पड़ सकता है। यह सोलर पैनल के नेचर पर निर्भर करता है। मोनो पैनल के लिए आपको कम खर्च आएगा। वहीं, बाईफेशियल पैनल के लिए आपको ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। हाल ही में सरकार ने सोलर पैनल को लेकर नई पॉलिसी बनाई है।
5kW का सोलर इन्वर्टर भारत में 45,000 रुपये से लेकर 95,000 रुपये के बीच में उपलब्ध हैं। इसकी कीमत भी ब्रांड के हिसाब से वैरी कर सकता है।
बैटरी स्टोरेज के लिए सबसे ज्यादा खर्चा करना पड़ सकता है। अगर आप लेड एसिड या ट्यूबलर बैटरी का इस्तेमाल करते हैं तो इसके लिए आपको कम से कम 50,000 रुपये का खर्च आएगा। वहीं, लिथियम आयन बैटरी के लिए आपको 1,20,000 रुपये तक का खर्च आएगा।
इस तरह से 5 किलोवाट का बेसिक सोलर सिस्टम लगवाने पर आपको करीब 2,20,000 रुपये खर्च करना पड़ सकता है। वहीं, एडवांस सिस्टम लगवाने पर इसकी लागत 3,50,000 रुपये तक पहुंच जाती है। इसके अलावा वायर और अन्य कंपोनेंट्स के लिए 1,00,000 रुपये का खर्च आएगा।
कितनी मिलेगी सब्सिडी?
पीएम सूर्य घर योजना के तहत केंद्र सरकार सोलर प्लांट लगवाने के लिए अधिकतम 78,000 रुपये तक की सब्सिडी देती है। सरकार की पॉलिसी के मुताबिक, 3kW या इससे ज्यादा का सिस्टम लगाने पर अधिकतम 78,000 रुपये देगी। वहीं, कुछ राज्य सरकारें भी सोलर सिस्टम के लिए सब्सिडी देती है। यूपी में सोलर सिस्टम लगवाने पर 30,000 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी। इस तरह कुल 1,08,000 रुपये बचाए जा सकेंगे।
5kW सिस्टम पर क्या-क्या चलेगा लोड?
5 किलोवाट का सिस्टम आम तौर पर फार्म हाउस, कोठी और कमर्शियल कॉम्प्लैक्स आदि के लिए इस्तेमाल होता है। इसमें पर 1.5 टन वाले दो से तीन इन्वर्टर एसी, 1kW का मोटर पंप, 8 से 10 पंखे, फ्रिज, कूलर समेत करीब 30 से 40 LED बल्ब का लोड आराम से चला सकते हैं। हाइब्रिड सिस्टम में अतिरिक्त बिजली को आप ग्रिड में भी भेज सकते हैं या फिर इसका इस्तेमाल बैटरी को चार्ज करने के लिए कर सकते हैं।
सब्सिडी के लिए कैसे करें अप्लाई?
- पीएम सूर्य घर योजना के तहत सब्सिडी लेने के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं।
- इसके लिए PM Sury Ghar की वेबसाइट (https://solarrooftop.pmsuryaghar.gov.in/) पर जाएं।
- यहां Register वाले ऑप्शन पर क्लिक करें और आगे बढ़ें।
- अगले पेज पर आपको अपना राज्य, बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) और अपना कंज्यूमर नंबर दर्ज करना होगा।
- इसके बाद मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी दर्ज करके रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करें।
- Rooftop सोलर पैनल के लिए अब आपको रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और OTP के जरिए लॉग-इन करना होगा।
- यहां आपको डैशबोर्ड पर दिए गए Apply For Rooftop Solar वाले ऑप्शन पर टैप करना होगा।
- फिर आगे की प्रक्रिया में आवेदन फॉर्म को भरना होगा और अप्रूवल का इंतजार करना होगा।
- अप्रूवल मिलते ही आपको अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने के लिए रजिस्टर्ड वेंडर को चुनना होगा।
- पैनल लगाए जाने के बाद DISCOM द्वारा इसे वेरिफाई किया जाएगा।
- इसके बाद आपके बैंक अकाउंट में सरकार द्वारा मिलने वाली सब्सिडी ट्रांसफर की जाएगी।
यह भी पढ़ें – 10 किलोवाट के सोलर पैनल लगाने का कितना आएगा खर्च? क्या-क्या चलेगा लोड? समझें पूरा गणित
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